writes "meri yah kahani kai pratisthit patrikao me chhapi thi .kripaya padhakar pratikriya bheje. कथा साहित्य
विजय सिंह मीणा
सिसकियाँ
अरावली शृंखला की उपत्यका में बसा यह यह गाँव ढाई तीन सौ घरों की एक खुशहाल बस्ती है. पश्चिम की और अरावली की उन्मुक्त एवं रमणीक पहाड़ियाँ अपने पूरे यौवन का आनंद बिखेर रहीं हैं. यहाँ की भूमि उपजाऊ है. इस गाँव में अधिकतर परिवार कृषि पर निर्भर हैं. भरपूर फसल होने के कारण यहाँ के अधिकतर किसान ठीक ठाक स्थिति में हैं. गाँव के ठीक पश्चिम में एक घर जिसमें तीन प्राणी रहते हैं. यह घर भरोसी का है जो सीधा साधा और दुनियादारी से बहुत दूर अपने आप में ही मगन रहता है. इसकी पत्नी रामकली, जो हाल ही में नवविवाहिता के रूप में इस घर की सदस्या बनी है. इनके अलावा इनके छोटे भाई हरिया राम जो कि हमेशा ही दन्द-फन्द की चोपड़ रचते रहते हैं. ये गाँव में जब तक दो चार लोगों से उल्टी सीधी नहीं भिड़ते तब तक इनका खाना हजम होना मुश्किल है.
"