12 वर्षों से नहरों का कंठ सूखा, 36 गांवों को पानी का इंतजार

इस परियोजना में सवाईमाधोपुर-करौली जिले के उपखंड सवाईमाधोपुर, मलारना चौड़, लालसोट, करौली, सपोटरा, हिंडौन, नादौती श्रीमहावीरजी सहित करौली के 20 सवाईमाधोपुर के 16 गांव शामिल हैं 

करौली-सवाईमाधोपुरजिलों के 36 गांवों के 11 हजार 960 हैक्टेयर भूमि को सिंचिंत करने के लिए बनाई गई पांचना बांध नहर परियोजना का लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है। दो जाति विशेष के लोगों के विवाद के कारण पांचना बांध से 12 सालों से नहरों में पानी नहीं छोड़े जाने से फसलों में सिंचाई का संकट बना हुआ है। हालांकि इस बार बारिश कम होने से पांचना बांध में ही पानी नहीं है। 

करौली-सवाईमाधोपुर जिलों के गांवों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने के लिए सरकार द्वारा 1997 में पांचना बांध नहर परियोजना का निर्माण कार्य शुरु कराया गया। परियोजना का निर्माण कार्य 2003 में पूरा हो गया। 

इस परियोजना में दोनों जिलों के 36 गांवों की 11 हजार 960 हैक्टेयर भूमि सिंचित होनी थी। दो साल तो नहरों में पानी छोड़ा गया और किसानों को फसलों में सिंचाई के लिए पानी मिलने से फसलें भी अच्छी हुई। वर्ष 2005 के बाद पांचना बांध के पानी को छोड़ने को लेकर दो जाति विशेष के लोगों में विवाद के चलते सिंचाई विभाग प्रशासन ने नहरों में पानी छोड़ना बंद कर दिया। तब से आज तक नहरों का कंठ प्यासा है। सूखी पड़ी नहरों के हालात बदतर बने हुए हैं। 
शायद साल 2018 कोई अच्छी खबर ले कर आये

सिंचाई विभाग करौली के अधिशाषी अभियंता हरिशंकर कुमावत का कहना रहा कि पानी छोड़े जाने को लेकर अब किसी प्रकार का कोई विवाद नहीं हैं। पूर्व में पांचना से माड़ क्षेत्र के लोगों को पानी नहरों से नहीं मिलने के पीछे पांचना संघर्ष समिति के लोगों का विरोध था, उनकी मांग थी कि पहले चंबल का पानी पांचना बांध में लाया जाए। लेकिन अब पांचना बांध में ही पानी नहीं हैं। एेसे में पानी कैसे छोड़ा जा सकता है। हालांकि अगले सप्ताह टेस्टिंग के रुप में पानी छोड़ने की संभावना है। 

पलायन को मजबूर किसान 

पांचनबांध से नहरों में पानी नहीं छोड़े जाने से किसान पलायन को मजबूर हैं। दोनों जिलों के 7 उपखंडों में फैली नहरों में पानी के अभाव में कीकर, आक, बबूल झाडियां ही नजर आती हैं। किसान अनाज चारे के अभाव में अपने मवेशियों के साथ पलायन को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि इसी तरह योजनाएं विवादों में अटकी रहेंगी तो आगे किसानों को रोटी का इंतजाम करना भी मुश्किल हो गया है ।
12 साल में भी नहीं सुलझा पांचना बांध का पेच

पांचना बांध जल वितरण समिति की बैठक संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में होती है। इसके लिए सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता ने फाइल भेज दी है। गुड़ला-पांचना लिफ्ट परियोजना का काम गति से चल रहा है। किसान नहर निर्माण में रोडा अटका रहे हैं। 10 किमी में 3 किमी तक नहर तो बना दी है। – 

मानसिंहचौधरी, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग, करौली

सरकारकिसानों के साथ पक्षपात अपना रही है। गहलोत सरकार ने गुडला के निकटवर्ती गांवों के लिए लिफ्ट योजना शुरू की थी। जो एक साल में पूरी होनी थी,वह सात साल में नहीं हुई है। इससे किसानों में आक्रोश है। जब तक परियोजना पूर्ण नहीं हो,तब तक किसानों के बिजली बिल माफ करें। नहीं तो ग्रामीण आंदोलन करेंगे। 

अशोकसिंह धाबाई, सदस्य, गुड़ला-पांचना लिफ्ट सिंचाई परियोजना

राज्यसरकार की उदासीनता विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से कमांड क्षेत्र के हजारों किसानों को रोजी-रोटी के लाले पड़ गए हैं। पिछले दस वर्षों से पांचना बांध से कमांड क्षेत्र के 35 गांवों की 9985 हेक्टेयर भूमि सिंचित नहीं हो पा रही है। जिससे किसानों के सामने बड़ी परेशानी हो गई है। 

गौरतलब है कि करौली के पूर्व विधायक स्व.हंसराम गुर्जर के नेतृत्व में 2004 में पांचना बांध के समीपवर्ती 12 गांवों के ग्रामीणों ने पांचना बांध पर अपना हक जताते हुए पहले बांध से 12 गांवों को पानी देने की मांग उठाई थी। प्रशासन के अधिकारियों ने जैसे-तैसे पूर्व विधायक हंसराम गुर्जर को मनाने में कामयाब हो गए और कमांड क्षेत्र के किसानों को नहरों में पानी छोड़ दिया। लेकिन 2005 में पुन: गुर्जर समाज के लोगों ने आंदोलन कर दिया,तब भी प्रशासन ने मौके पर ही गुड़ला-पांचना लिफ्ट परियोजना के सर्वे की घोषणा कर दी और आंदोलन समाप्त कर दिया। इस पर संघर्ष समिति पानी खोलने पर सहमत हो गई। 

कमांडएरिया को पानी मिलना चाहिए। बांध के पानी का उपयोग होना चाहिए। इस बिंदु पर सोचें। गुड़ला पांचना लिफ्ट परियोजना को निर्धारित अवधि में पूर्ण कराएंगे। – मानसिंहगुर्जर, विधायक, गंगापुरसिटी

पूरेक्षेत्र में पानी की डिमांड है। विधायक मानसिंह ने चुनाव के दौरान पांचना बांध से पानी खुलवाने की बात कही, लेकिन उन्होंने भी कुछ नहीं किया। सरकार ध्यान दे, अन्यथा मजबूरन आंदोलन करना पड़ेगा। – 

गायत्रीमीना, प्रधान, पंचायत समिति, गंगापुर सिटी

 यह कहना है हमारे स्थानीय नेताओं का नहर खुलवाने के बारे में,जिनके भरोसे हम पिछले 12 साल से बैठेहुए है ।वहीं लोकलुभावन बातें इसलिए हमें खुद ही आगे आना पड़ेगा
पाँचना बाँध परियोजना का इतिहास

पाँचना बाँध का निर्माण करौली शहर के निकट पाँच नदियों 1. बरखेड़ा 2. भद्रावती 3. मॉची 4. भैसावट 5. अटाकी के संगम से बनी गम्भीर नदी पर शहर से 12 किलोमीटर दूर हिण्डौन-करौली मार्ग पर गुडला के पास किया गया । इसका निर्माण वर्ष 1977 से लेकर 2004 के मध्य लगभग 125 करोड़ रूपये की लागत से हुआ। इस बाँध की भराव क्षमता 2100 मिलियन क्यूबिक फीट, 240 डैड व 1860 लाइव स्टोरेज है अर्थात् इस बाँध से 1860 एमसीएफटी पानी सिंचाई हेतु उपलब्ध हो सकता है। 

पाँचना बाँध का कुल कमाण्ड क्षेत्र 9985 हैक्टेयर (39478 बीघा) है जोकि दो जिलों सवाई माधोपुर व करौली में विभाजित है। करौली जिले के 18 गाँवों की 4895.93 हैक्टेयर व सवाई माधोपुर के 17 गाँवों की 5089.03 हैक्टेयर भूमि कमाण्ड क्षेत्र में आती है। एक बीघा खेत का क्षेत्रफल 165 फीट x 165 फीट = 27225 वर्गफीट होता है। एक बार की सिंचाई हेतु भूमि को लगभग 4 इंच अर्थात् 4/12 =1/3 फीट पानी की आवश्यकता होती है। इस प्रकार एक बीघा खेत की सिंचाई के लिए 27225 x 1/3 = 9075 घन फीट पानी की आवश्यकता रहती है। पाँचना बाँध की सिंचाई क्षमता के अनुसार इस बाँध से 204959 बीघा भूमि को एक बार या कमाण्ड क्षेत्र की भूमि को 5 बार भराया जा सकता है।

 सूचना के अधिकार के तहत् माँगी गई सूचना के अनुसार वर्ष 2004 से 2006 तक 9985 हैक्टेयर भूमि के लिए सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाई गई परन्तु वर्ष 2007 के उपरान्त बाँध में पानी की अवाक होने के बावजूद भी गूर्जर आन्दोलन के कारण नहर में पानी नहीं छोड़ा गया। 
नहरों में पानी नहीं छोड़ने के कारण कमाण्ड क्षेत्र के गाँवों के किसानों को निम्नलिखित आर्थिक हानि हो रही है –

  1. सिंचित व असिंचित फसल के उत्पादन में अन्तर के कारण प्रति फसल सीजन लगभग 100 करोड़ रूपये की आर्थिक हानि।

  2. जिन थोड़े बहुत किसानों के पास भूजल की उपलब्धता है, सिंचाई हेतु पानी उपयोग करने के लिए उन्हें बिजली व डीजल संचालित उपकरणों का प्रयोग करना पड़ता है जिससे कृषि उत्पादन की लागत बहुत अधिक बढ़ जाती है। 

  3. भूमि क्रय-विक्रय के समय रजिस्ट्री के चार्ज तथा भेज कमाण्ड एरिया होने के कारण बढ़ी हुई दर से लगते  है।

  4. ट्यूबेल व पम्पिंगसेट के माध्यम से भू-जल के अधिक दोहन की वजह से भू-जल का स्तर बहुत नीचे चला गया है जिससे पीने के पानी तक की समस्या हो जाती है।

5.पानी की कमी के कारण चारा नहीं होने से पशुपालन का व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
आवश्यकता है कि सरकार, सभी पार्टियो के राजनेता व् समझदार समाज सेवी कंमांड एरिया के गॉंवों के किसानों की पीड़ा को समझे एवम इस वर्ष 2018  में सीजन हेतु पांचना बांध की नहर में पानी खुलवायें । व्यक्तिगत तौर पर हम सभी राजस्थान संपर्क पोर्टल पर नहर में पानी खुलवाने के लिए सरकार से अनुरोध/ शिकायत करे एवम अपने अपने जानकर नेताओ से भी कुछ करने हेतु निवेदन करें ताकि एक जनजागृति पैदा करने में हम हमारा रोल तो अदा कर सके।

कलम से—-

डॉ भूर सिंह मीणा,सहायक आचार्य  (सर्जरी)

जे•एल •एन•मेडिकल कालेज अजमेर 

हाल-गाँव किशोरपुर तहसील-वजीरपुर जिला-सवाई माधोपुर

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