यदि हैं किसान का खून तुम्हारे अंदर तो किसानों के लिए लड़ने की उम्मीद आप से करते हैं

किसान कर्ज से दबता जा रहा है और सरकारी योजनाओं का फण्ड बढ़ता जा रहा है

लेकिन ना नदियों को नहरों से जोड़ा गया हैं और ही पीने को पानी आ रहा हैं

अरबो रुपये किसानों के नाम पर कंपनियों को लुटाये गए, फिर भी किसान के खेत मे अब तक पानी नहीं
और हमें भी जो अब पढ़ लिख गए, उन्हें सच मे खेतीबाड़ी की परवाह नहीं

अरे जब किसान ही मर जायेंगे, तो फिर क्या सोने के गास खायोगे
समझ तुम्हे भी आएगा, लेकिन ये भी सोचो, तब तक क्या भूखे किसान जी पायेंगे।

नदिया जोड़ो, नहर बनायो ये सब सरकारी नारे हैं
सच में तो ये सब सरकारी सिस्टम ही किसानों के हत्यारे हैं।

जय जवान जय किसान, सुनने में कितना अच्छा लगता हैं,
फिर भी हर रोज बॉर्डर पर जवान और खेतों में किसान मरता हैं।

वोटों के वक्त हर हर नेता खुद को किसान का बेटा बतलाता हैं,
जीतने के बाद फिर पाँच साल खूब चादर ओढ़ कर सोता हैं।

कभी तो उस गरीब की झोपड़ी में भी जाकर देखों
उन भूख से बिलखते बच्चों की भी हालत देखो
आज खुद अन्नदाता एक एक दाने को मोहताज हैं,
कभी तो उनके जीवन के बारे में भी सोचो।

आग लगी हैं इस युवा मन में
हाथ जोड़के अनुरोध मैं आप सभी से करता हूं।
हैं यदि किसान का खून तुम्हारे अंदर
तो किसानों के लिए लड़ने की आस आप सभी से करता हूं।।

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