जलियावाला से पहला नरसंहार, “#मानगढ_जनसंहार”

◆◆#हमारी_नई_पीढ़ी_को_ये_जानना_ही_होगा◆◆
राजस्थान-गुजरात की सीमा पर अरावली पर्वत श्रंखला में दफन हैं जलियावाला से पहला नरसंहार,“#मानगढ_जनसंहार”

#आखिर क्या डर है जिसकी वजह से भारत के नवपीढ़ियों को भारत का सही इतिहास नहीं बताया जाता है? बुद्धिवर्ग आमन्त्रित है।
राजस्थान-गुजरात की सीमा पर अरावली पर्वत श्रंखला में दफन है करीब एक सदी पहले आज के दिन 17 नवंबर, 1913 को अंजाम दिया गया एक बर्बर आदिवासी नरसंहार !
सामंतों व रजवाड़ों द्वारा #गोविंद गुरु को एक खतरा बता कर अंग्रेजो के द्वारा गिरफ्तार कराया परंतु आदिवासियों ने इसे चुनौती के रूप में लिया और अंग्रेजो को गोविंद गुरु को रिहा करना पड़ा ! इसका अंत यहीं नहीं हुआ ! इसके बाद आदिवासियों पर अंग्रेजो और सामंतो के द्वारा अत्याचार और बढ़ा दिए गए ! सामंतों व रजवाड़ों द्वारा भीलो पर हिंसात्मक हमले तो हो ही रहे थे इसके अलावा भीलो के उन पाठशालाओं को बंद कराना एक बड़ा प्रयोजन था जिसके द्वारा आदिवासी बेगार से मुक्ति होने कि शिक्षा ले रहे रहे थे !
भीलों को मानगढ़ खाली करने की आखिरी चेतावनी दी गई जिसकी समय सीमा 15 नवंबर, 1913 थी, लेकिन भीलो ने इसे मानने से इनकार कर दिया !

17 नवंबर, 1913 को मेजर हैमिलटन सहित तीन अंग्रेज अफसरों की अगुआई में मेवाड़ भील कोर और रजवाड़ों की अपनी सेना ने संयुक्त रूप से मानगढ़ पहाड़ी को घेर लिया और भीलों को छिटकाने के लिए हवा में गोलीबारी की जाने लगी, जिसने बाद में बर्बर नरसंहार की शक्ल अख्तियार कर लिया ! लाखों लोगों पर अंधाधुँध गोलीबारी की गई और लोग जान बचाने के लिए कई लोग खैड़ापा खाई की ओर भागे और भगदड़ में मारे गए ! अंग्रेजों ने खच्चरों के ऊपर ‘तोप जैसी बंदूकें’ लाद दी थीं और उन्हें वे गोले में दौड़ाते थे तथा गोलियां चलती जाती थीं, ताकि ज्यादा-से-ज्यादा लोगों को मारा जा सके ! इसकी कमान अंग्रेज अफसरों मेजर एस. बेली और कैप्टन ई. स्टॉइली के हाथ में थी ! इस कांड में कहा जाता है कि गोलीबारी में 1500+ भील व अन्य वनवासी शहीद हुए ! इस बर्बर गोलीबारी को एक अंग्रेज अफसर ने तब रोका जब उसने देखा कि मारी गई भील महिला का बच्चा उससे चिपट कर स्तनपान कर रहा था !”

मानगढ़ नरसंहार


अधिक जानकारी के #हरिराम सर का उपन्यास देखें??
◆◆◆डॉ. Lokesh Kumar Meena आदिवासी

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