दुनिया में सबसे कम उम्र में विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित  गुर्जर की पत्नी से मिलकर गोलमा जी ने दिया सामाजिक एकता का नारा

दुनिया में सबसे कम उम्र में विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित  गुर्जर की पत्नी से मिलकर गोलमा जी ने दिया सामाजिक एकता का नारा

यह तो आप सभी जानते होंगे कि राजस्थान की धरती को वीरों की धरती कहा जाता है और इस धरती को वीरों की धरती यू नहीं कहा कहा जाता है इस धरती ने जन्म जन्मांतर से हजारों वीरों को जन्म दिया है और जिन्होंने इस देश भूमि के लिए बलिदान देने में सबसे आगे रहे हैं और आज हम आपको एक ऐसी कहानी बताने जा रहे हैं जो आपकी अपनी है लेकिन शायद आप नहीं जानते हो

विक्टोरिया क्रॉस दुनिया का सबसे बड़ा  और पुराना सैनिक सम्मान है जिसे ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रदान किया जाता है पहले यह सम्मान सिर्फ अंग्रेज सैनिकों को दिया जाता था लेकिन प्रथम विश्व युद्ध के बाद यह सम्मान भारतीय सैनिकों को भी दिए जाने लगा अब तक विक्टोरिया क्रॉस से भारत के 5 जवान सम्मानित हुए थे और उन्हीं में से एक नाम है कमल राम गुर्जर

सबसे कम उम्र में सम्मान मिला था कमल राम गुर्जर को

मात्र 19 साल की उम्र और 11 माह की नोकरी में ही मिल गया था विक्टोरिया क्रॉस

राजस्थान की धरती पर जन्मे वीर सपूत कमल राम गुर्जर मूलतः करौली जिले के नंदेश्वर भूमिया धाम के पास के गांव भोलू पूरा के थे और यह ब्रिटिश रेजीमेंट में सिफाई थे

अदम्य साहस की प्रतिमूर्ति कमलराम गुर्जर ने सबसे कम उम्र में 12 मई 1944 को तत्कालीन ब्रिटेन के सम्राट जॉर्ज पंचम के हाथों विक्टोरिया क्रॉस अवॉर्ड हांसिल कर विश्व पटल पर मान बढ़ाया। समाज किसान वर्ग ने देशसेवा सीमा की रक्षा में उनके योगदान एवं उम्दा दिलेरी को अक्षुण्य बनाये रखने के लिए गांव टोंके स्थित नंदे भौमिया मंदिर परिसर में उनकी प्रतिमा का अनावरण कर प्रेरणादायी पहल की है। इस प्रतिमा से सात दशक बाद वीसी गुर्जर को मरणोपरांत पुन: मान-सम्मान और पहचान मिली है। गौरतलब है कि वीसी स्व.कमलराम की प्रतिमा स्थापना के लिए 10 जून 2014 को समाज के हजारों लोगों की मौजूदगी में पंजाब रेजीमेंट सेना के लेफ्टिनेंट सी.पी.सिंह एवं कर्नल अश्वनी राणा ने पुष्पचक्र चढ़ाकर स्मरण के साथ भूमि पूजन किया था। प्रतिमा का 14 सितंबर 2015 को गरिमामयी माहौल में अनावरण हुआ। 91 वर्षीय वीरांगना सुरजो को पति कमलराम की वीरता पर गर्व और वीसी अवॉर्ड पर फक्र और गर्व महसूस होता हैं।

जब वीरांगना सुरजो से मिली गोलमा देवी

राजस्थान की विधायक श्रीमती गोलमा देवी कल करौली जिले के भोलूपुर गांव के दौरे पर थी और जैसे ही वहां पर उन्हें बताया गया कि इस गांव की धरती ने बड़े-बड़े वीरों को जन्म दिया है और विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित कमल राम गुर्जर जी का जन्म स्थली भी यहीं पर है तो कॉल माजी उनकी धर्मपत्नी वीरांगना सुरजन से मिलने उनके घर पहुंची तो वहां का नजारा बहुत ही निराला था।

कुछ इस तरह से हुई मुलाकात

 गोलमा देवी कल सपोटरा दौरे पर थी,गुर्जर भाइयों ने ग्राम भोलुपुरा में कल गुर्जर-मीणा एकता का परिचय दिया ज़ोरदार तरिखे से गोलमा जी के स्वागत में वहाँ की माताओं बहनों ने पलक-पाँवड़े बिछा दिये,युवाओं में भयंकर जोश था सभी युवा पटाखे फ़ोड रहे थे जैसे गोलमा जी चुनाव जीतकर कोई विजय जुलूस में हों,चारों और एक ख़ुशनुमा माहोल था बुज़ुर्गों को आँखों में आस थी मैं ख़ुद वहाँ मौजूद था इसलिये लिख रहा हूँ जो महसूस किया मैंने,गाँवों में जनता नेताओं के जाने पर बहुत सारे काम बताती है लेकिन वहाँ मौजूद एक भाई बोला की भोलुपुरा में भारत देश का एक महान जवान हुआ है जो विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित है जिनकी विधवा पत्नी आज भी ज़िंदा है आप मिलोगी उनसे गोलमा जी,तुरंत ही हम वीर स्व.श्री कमलराम गुर्जर द्वितीय विश्व युद्ध में विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित योद्धा के घर उनकी बूढ़ी पत्नी सुरज़ो देवी जी से मिलने गये खाट पर बेठी सुरज़ो जी को जाकर गोलमा जी ने गले लगाया शोल उढ़ाई और माला पहनाई और खूब देर बातें की,मैंने एक बात पूछी की आज भी आपको आपके पति की याद आती है तो सुरज़ो जी बोली दिल में धरो है पर का बणे……गोलमा जी ने सुरज़ो जी से कहा आपके आदमी महान थे हमें उनपर गर्व है उनकी वीरता के सहारे आप अपने बुढ़ापे के दिन ख़ुशी-ख़ुशी जीयो बेटा-बेटी पोता-पोती सेवा करें क क़ुन तो जवाब में बोली करे है सेवा,,हमें कल ऐसे महान योद्धा के घर जाना भी नसीब हुआ मन को बहुत ख़ुशी मिली साथियों,और गुर्जर भाइयों ने जो सम्मान आदर सत्कार किया डॉक्टर साहब गोलमा जी का,उसके लिए सदैव ऋणी रहेंगे व भोलुपुरा ग्राम पंचायत के समस्त ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा के लिये 24 घंटे सेवा में तत्पर रहेंगे! 

वीर VC कमलराम की और जानकारी

ग्राम पंचायत जहांगीरपुर के गांव भोलूपुरा में 17 दिसंबर 1924 को माता रुक्मणी देवी की पावन कोख से,पिता श्योचंद गुर्जर के घर कमलराम का जन्म हुआ। ब्रिटिश हुकूमत के दौरान कमलराम गुर्जर में कुछ कर गुजरने का जज्बा था और वे सेना के पंजाब रेजीमेंट में बतौर सिपाही दाखिल हो गए। 2 राजपूत रेजीमेंट की वी कंपनी में रहते हुए साहसिक कार्यों के फलस्वरूप कई अवॉर्ड भी मिले। इनमें इतिहास के पन्नों में दर्ज होने वाला सम्मान विक्टोरिया क्रॉस था। गुर्जर पंजाब रेजीमेंट से ऑनररी कैप्टन पद से रिटायर्ड हुए और 1 जुलाई 1982 को उनका देहांत हो गया था।

सेना के जांबाज कमलराम गुर्जर को विक्टोरिया क्रॉस अवॉर्ड उनके द्वारा गारी नदी पार कर रोम किले की तीन चौकियों को रात्रि में ध्वस्त करके, अपनी सेना के रास्ते को साफ करने के टास्क में सफलता मिलने पर मिला था। किले के नजदीक दुश्मनों तक पहुंचने पर मेजर राइट कंपनी के एक कमांडर को कैद भी कर लिया था। उस समय रेजीमेंट के मात्र 11 जवान जीवित बचे,बाकी साथी शहीद हो चुके थे। खास बात यह थी कि रोम किले पर रस्सी से चढ़ने को कोई भी सैनिक तैयार नहीं हुआ तो कमलराम गुर्जर ने साहस दिखाते हुए रस्सी के सहारे किले पर चढकर दुश्मन पक्ष के 3 जवानों को घायल करते हुए 6 को मौत के घाट उतारा

गोलमा जी

इसके बाद दूसरी चौकी पार करने के दौरान एक अंग्रेज ऑफिसर से छूटकर तीसरी चौकी पार करते हुए साथी अफसरों को जर्मन सेना से मुक्त कराया और रोम किले पर विजयी झंडा फहराया। द्वितीय विश्व युद्ध को अपने नाम कर अदम्य साहस वीरता के लिए गुर्जर को विक्टोरिया क्राॅस अवॉर्ड से नवाजा गया। ब्रिटिश फोर्स के लिए इटली में जर्मन फोर्स से लड़ने पर एवं तीन टैंक मशीनों को बर्बाद कर जंग जीतने पर मिला था। गौरतलब है कि आज स्वतंत्र भारत में इसके समकक्ष परमवीर चक्र प्रदान किया जाता है।

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