जाँबाज रेलवे गार्ड ने अपनी जान जोखिम में डालकर टाला बड़ा रेल हादसा

जाँबाज रेलवे गार्ड ने अपनी जान जोखिम में डालकर टाला बड़ा रेल हादसा

इंसान सूझबूझ और हौसले से काम ले तो बड़ी से बड़ी मुसीबत को भी टाल सकता हैं और ऐसी ही हिम्मत से काम लिया भारतीय रेलवे में गार्ड की ड्यूटी पर तैनात रेलवे ट्रैन गॉर्ड श्री जयदीप मीना ने
मालगाड़ी के गार्ड की सूझबुझ से एक बड़ा रेल हादसा टल गया। एक 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही एक मालगाड़ी का पिछला डिब्बा (ब्रेकयान) अचानक उछल गया और ओएचई लाइन के खंभे से टकराते हुए दूसरी पटरी पर आ गया। इस घटना में मालगाड़ी का गार्ड उछलकर ट्रैक पर पड़ी गिट्टी पर जा गिरा और जख्मी हो गया। इसी बीच पटरी पर सामने से एक यात्री ट्रेन आ रही थी। लेकिन जयदीप घबराया नही और जख्मी हालत में ही उसने यात्री ट्रेन की तरफ इमरजेंसी लाइट जलाते हुए दौड़ लगा दी और ट्रेन को रुकवाया लिया। गार्ड की इस सुझबूझ से बड़ा रेल हादसा होने से बच गया।
यह घटना सोमवार रात 11.45 बजे भोपाल रेल मंडल के बानापुरा रेलवे स्टेशन के पास की है। इसके चलते सोमवार-मंगलवार की दरम्यिानी रात करीब चार घंटे इटारसी-मुंबई रेल मार्ग बंद रहा। इटारसी स्टेशन से सोमवार रात 10.30 बजे कानको मालगाड़ी खंडवा के लिए चली थी। 40 डिब्बों की यह मालगाड़ी बानापुरा स्टेशन के पास 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही थी। स्टेशन निकले के 200 मीटर बाद अचानक ब्रेकयान उछल गया और पास में लगे ओएचई के खंभे से टकराते हुए डाउन ट्रैक पर आ गया। इसके चलते ब्रेकयान में ड्यूटी कर रहा गार्ड जयदीप मीना ट्रैक पर गिर गया। करीब 100 की दूरी पर मालगाड़ी भी रूक गई।
घटना में गार्ड जयदीप को पैर, हाथ व सिर में गंभीर चोटें आई है। फिर भी गार्ड ने हार नहीं मानी और खंडवा की तरफ से डाउन ट्रैक पर आती हुई एलटीटी-गोरखपुर सुफरफास्ट एक्सप्रेस (12542) की तरफ इमरजेंसी लाइट जलाते हुए दौड़ लगा दी। यह देख पायलट ने यात्री ट्रेन को रोक दिया। बताया जा रहा है कि
गार्ड ट्रेन नहीं रूकवाता तो उसकी टक्कर पहले से डाउन ट्रैक पर क्षतिग्रस्त ब्रेकयान से हो जाती और बड़ा हादसा हो जाता।
आधे घंटे के भीतर पहुंची दुर्घटना राहत टीम
सबसे पहले घटना की सूचना गार्ड ने दी, इसके बाद बानापुरा डिप्टी एसएस केके कोरी ने इटारसी स्टेशन पर अधिकारियों को बताया। तुरंत बाद इटारसी में दुर्घटना राहत टीम को अलर्ट किया गया और राहत ट्रेन बानापुरा भेजी गई। टीम करीब 12.30 बजे मौके पर पहुंची और राहत कार्य संभाला। करीब 4 बजे दोनों ट्रैक चालू किए। हालांकि राहत कार्य मंगलवार दोपहर 2 बजे तक चलते रहा। तब तक ट्रेनों को क्षतिग्रस्त एरिए में 30 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलाया गया
Jaydeep

मेरी जान भी जा सकती थी लेकिन ट्रेन रुकवाना जरूरी था

मैंने कुछ समय पहले बानापुरा स्टेशन का होम सिग्नल पार करने की सूचना पायलट को दी थी। इस बीच एक झटका लगा और ब्रेकयान खंभे से टकरा गया। मैं ट्रैक पर पड़ी गिट्टी व पटरियों के बीच गिर पड़ा। जब देखा कि डाउन ट्रैक पर सामने से कोई ट्रेन आ रही है तो मैं इमरजेंसी लाइट जलाते हुए ट्रैक पर भागा। मुझे मालूम था कि ओएचई लाइन फाल्ट हुई है मेरी जान को खतरा हो सकता है लेकिन ट्रेन रूकवाना जरूरी था। बाद में यह जानकर बहुत खुशी हुई कि जो ट्रेन मैंने रुकवाई वह यात्री ट्रेन थी।

गार्ड जयदीप मीना

ये हो सकती है हादसे की वजह

मालगाड़ी 40 डिब्बों की और खाली थी जिसकी रफ्तार अधिक थी। साथ ही ब्रेकयान चार पहियों वाला था जो हल्का होता है जिसके अधिक रफ्तार के चलते उछलने की संभावना होती है। सूत्रों के मुताबिक यह घटना की मुख्य वजह हो सकती है। हालांकि रेलवे ने इसकी जांच शुरू करा दी है।

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