कहीं दूसरा कन्हैया कुमार ना बन जाये मनीष मीणा, इसलिए डरी हुई पूरी केंद्र सरकार

एक चिंगारी और एक विचार, जो कभी खत्म नही हो सकता। आप जब प्रग्रतिशील भाषण देकर किसी सभा या सेमिनार मे आ जाते हो, लेकिन जब आपकी जरूरत आपके लोगो को हो उस वक्त अगर गायब हो तो आपका पूरा ज्ञान फालतू व बकवास है।जब मेरे ऊपर लगातार नोटिस भेजे जा रहे है तो कुछ दोस्त है, जो मेरे साथ खड़े और शायद आगे भी ईमानदारी से खड़े होंगे, वो नही है बुद्धिमान, वो नही है प्रग्रतिशील, लेकिन उन्हें विश्वास हैं मुझ पर कि मैं उनके लिए ईमानदारी से खड़ा होंगा और लड़ाई लड़ूंगा -मनीष मीणा

जब इस देश के अंदर संविधान और सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों की अवहेलना करके सरे आम देश की सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया जाता हैं, तो ये सरकारे मौन हो जाती हैं, जब देश भर के सिनेमाघरों को जलाया जाता हैं, तब कहाँ चली जाती हैं देश की सुरक्षा व्यवस्था… तब इस को चलाने वाले बोलते हैं कि सबको देश के अंदर आंदोलन करने की छूट हैं… चाहे उस आंदोलन के फेर में देश की जनता को ही जला डालो… चाहे ही भगवा डंडे लेकर सरेआम महिलाओं से वैलेंटाइन डे की विरोध में खूब छेड़ लो….सब सरकारी आदेश माफ हो जायेगे…

.लेकिन जब इस देश का युवा शान्तिपूर्ण तरीके किसी नीति का विरोध करे, जबकि ना वे किसी सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचा रहे ना ही किसी के साथ बदतमीजी कर रहे फिर भी सरकार को उनके आंदोलन में आतंकवादी नज़र आते हैं

जी हाँ हम बात कर रहे हैं दिल्ली के जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के ड्रामे की, जहां रोजगार की माँग को लेकर कुछ छात्र पकौड़े बेचकर विरोध कर देते हैं, पूरा प्रशासन उन छात्रों को बरबाद करने पर आमादा हो जाता हैं, छात्रों से हॉस्टल खाली करवा के बाहर कर दिया जाता है। सरकारी फाइन पे फाइन लगा दिए जाते है।

#प्रधानमंत्री #पकोड़ा #रोजगार #योजना का विरोध करते हुए जेएनयू के छात्र #सवाई #माधोपुर के #मोहचा #का #पुरा निवासी #मनीष #मीना ने जब जेएनयू कैम्पस में लाखों वेरोजगार युबाओ की भावनाओ को समझते हुए मोदी सरकार के विरोध में पकोड़ा रोजगार खोला तो केन्द्र सरकार में हड़कंप मच गया कि #जेएनयू के अंदर देश में मनीष मीना रूपी दूसरा कन्हैया कुमार न पनप जाए इसलिए मोदी सरकार के इशारे पर जेएनयू प्रशासन ने मनीष जी पर यह तुगलकी कार्यवाही करते हुए उन पर 20 हजार का जुर्माना लगा दिया…मनीष मीना के संघर्ष को सलाम…

एक छोटी सी चिंगारी, कितनी बड़ी या भयानक हो सकती है, यह देख सकते हो कि कुछ छात्रों ने विरोध करते हुए पकोड़े बनाए और जेएनयू के कुलपति के कार्य करने का तौर-तरीकों का विरोध किया, लेकिन कुलपति महोदय उस पर छात्रों को 20 हजार रुपए के जुर्माने के नोटिस भेज देता है, उस पर छात्रों का गुस्सा कुछ इस तरह निकलता है कि कुलपति महोदय को EC मीटिंग तारीख बदलनी पड़ती है और कुलपति महिदय डर कर आता ही नही है।

क्या यहीं है देश का संविधान

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