जब मूल्यों बाबा को जिंदो ने पकड़ लिया था

बात उन दिनो की जब हमारी जमात में सायद ही कोई पढाई लिखाई को जानता होगा,,,,,सभी ने छप्पनिया अकाल का नाम तो सुना होगा!

मुल्यों भायो मीणो नाम का  एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण का किसान चैनपुरया में निवास करता था!वैसे अनपढ़ होने के बावजूद भी मुल्यो किसान किसी धार्मिक आडम्बर जादू टोना भूत पिशाच चुड़ैल जिन्न आदि को नही मानता था!

छप्पनिया अकाल के दौरान ही मुल्या किसान का ब्याह पास ही के गांव सरवलगढ़ खेडा में तय हो गया!

मुल्या किसान का ब्याह हो गया और तीन बरस बाद गौणा हो गया,,,,उस समय स्वतंत्रता आंदोलन ने जोर पकड़ रखा था!

बाबा डरे नहीं हो
गौणा के कुछ दिन बाद ही मुल्या किसान की घरवाली चावली जोकि नाम के अनुरूप सुंदर तो थी और चालक भी थी!

चावली रोज अपने शरीर मे भूत भराने का ढोंग कर लिया करती थी,,,,और घर का कार्य करने से बच जाती थी लेकिन एक दिन मुल्यो किसान उस चावली से परेशान हो गया!

चावली ने भी मुल्या किसान पर आरोप लगाने में कसर नही छोड़ी,,,,,,दोनो गांव की इस मामले में पंचायत हुई!

भरी पंचायत में चावली ने एक श्याणे से मिलकर नाटक रच लिया!

पंचायत के सामने चावली लोट पोट होकर गिर गई!

तभी खैराती भोपो आयो और चावली की नब्ज देकर बोलने लगा इसके तो जिन्न भर आया है!

खैराती भोपा के कहने पर पंचायत ने मुल्या को आदेश दिया कि कल पुण्यु हैं!

पुनयू के दिन जोत जुड़वा कर इस चावली का इलाज करवाना हैं!
खैराती भोपा की मुल्या किसान से पुरानी दुश्मनी थी उसी का बदला लेने के लिए उसने चावली से मिलकर ये सब सँवाग रचवा दिया!
“वो कहते हैं न मरता क्या नही करता  ”

मुल्या किसान न चाहते हुए भी अपने घर मे भूत जिन्न न के जोत जुड़वा ने में मजबूर हो गया!
अगले दिन मुल्या किसान की तिबारी पर शाम होते होते गांव वालों का जमघट लग गया!

गांव के सभी स्त्री पुरुष बच्चे बूढ़े जिन्न को देखने के लिए उत्सुक हो रहे थे!

मुल्या किसान सांझ होते होते हार से अपने बैलों को लेकर आया और उन्हें खूंटे के बांध कर बद्री बणिया की दुकान से पूजा की सामग्री उधार लेकर आ गया!
उस दिन  आसमान में बादल मंडरा रहे थे इसलिए चंद्रमा  भी आने में देर कर रहा था और हवा देखो तो सांय सांय की आवाजें निकाल रही थी!

उस दिन मुल्या किसान की मां अपने मायके चली गई थी सो घर मे भी कोई बड़ा बुजरुग नही था!
अब खैराती भोपा को बुलाया गया  और ग्रामीणों का जमावड़ा टश से मश नही हो रहा था!
खैराती भोपा ने आते ही मूल्या किसान के घर के तीन चक्कर काटते हुए कोई दो सेर उड़द बिखेर दिए होंगें
अब अचानक खैराती भोपा मुल्या किसान के घर के बीचों बीच आकर बैठ गया और देवता भराने का नाटक करने लगा!

ढप की आवाज सुनकर चावली घर के अंदर ही हुंकार भरने लगी,,,,,चारो तरफ डर का साया व्याप्त था,,,,,गांव वाले बड़े भयभीत थे लेकिन इन सब का मुल्या किसान पर कोई असर नही हो रहा था औऱ वह मन ही मन यह सोच  रहा था कि आखिर ये भूत जिन्न तो कुछ होते ही नही लेकिन ये चावली और खैराती भोपा मुझसे क्या चाहते है!
चूंकि मुल्या किसान बहुत मेहनती और निर्भीक व्यक्ति था तो उसके चेहरे पर कोई शिकन नाम की चीज नही थी!
अब खैराती भोपा के शरीर मे देवता आ गया और वह जोर जोर से आवाजे निकालने लगा तथा बार बार चावली की चोटी पकड़ पकड़ कर कह रहा था  तू इसके शरीर को छोड़ कर चले जा वरना तुझे गरम गरम अंगारों पर चलाऊंगा!
अब तो  गांव के लोग और भी भयभीत होने लगे,,,,,,डर से सहमे सहमे एक दूसरे के चिपक चिपक कर खड़े हो गए
अबकी बार जब  खैराती भोपा ने चावली की चोटी पकड़ी तो चावली मर्दाना आवाज में बोलने लगी 

मैं इसे हमेशा हमेशा को छोड़ दूंगा लेकिन इसके मर्द को पैर छूकर अपनी मां का काला मुँह करके गधे पर बैठा कर पूरे गांव के तीन चक्कर लगा कर चावली के सामने नतमस्तक होना पड़ेगा!

अब मुल्या किसान की आफत और बढ़ गई क्योकि उसकी मां तो उसके मायके गई हुई थी,,,,,,,अब मुल्या ने हिम्मत कर मिन्नतें करते हुए बोला कि महाराज दो घण्टे समय दो,,,तो अपने मामाओ के जाकर मां को लेकर आऊ!!

खैराती भोपा बोला जल्दी कर जल्दी वरना आज की रात निकल गई तो फिर यह जिन्न हमेशा हमेशा के लिए इसके शरीर मे बस जाएगा!!•

मुल्या किसान को अभी भी भूत जिन्न न पर भरोसा नही था और उसने अपने मामा के गांव जाने के बजाए अपनी ससुराल चला गया और अपनी सास को अपनी आपबीती लाग लपेट लगाकर सुना दी!

मूल्या किसान की सास ने देर न करते हुए अपनी बेटी की जिंदगी बचाने के लिये अपने दामाद के सँग हो ली!!

उधर मुल्या के इंतजार में चैनपुरा वाले उसके घर पर जमघट जमाये बैठे थे,,,,कि तभी दूर से एक व्यक्ति गधे का कान पकड़े हुए उसपर एक औरत को बैठा कर ला सरपट चला आ रहा था!

मुल्या किसान ने खैराती भोपा के पैर छूकर गांव के तीन चक्कर लगा लिए और चावली के सम्मुख आ खड़ा हुआ!!

चावली अपने तेवर खींचते हुए मुल्या किसान से बोली,,,,,,,,,,,देख बंदी का चाड़ा गधे चढ़ी मुँह काला”

मुल्या किसान चावली और खैराती भोपा के हाव् भावों को समझ गया और तुरन्त बोला देख बन्दे की फेरी अम्मा तेरी क मेरी

चावली का ढोंग जबको समझ आ गया और खैराती भोपा जो लोगो को मूर्ख बनाकर अनाज घी दूध दही पैसे ऐंठता था उसकी पोल खुल गई,,,,,,,,,सारे गांव वालों ने मुल्या किसान की वैज्ञानिक सोच और चतुराई की खूब प्रसंशा की!!

#Note:- कहानी के पात्र , छायाचित्र और घटनाएं सब काल्पनिक है! इनसे किसी के वास्तविक जीवन से कोई मेल नही है यदि संयोग वश किसी से इनकी साम्यता मिलती है तो वो केवल सन्योग मात्र ही समझा जाए!!

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Meena Samaj

Hi

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