Category: साहित्य

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 आ मेरे आगोश में तुझे सब कुछ सिखा दूं, तेरी टांट मे जितने बाल हैं वो भी झडा दूं – शायर रामजीलाल जुल्मी

मेरे बचपन के संस्मरण  बात उन दिनों की है जब हम हायर सैकेन्ड्री में तहसीली कस्बे में पढते थे । मेरा एक मित्र था रामजीलाल । अपनी धुन का पक्का , कुछ अलग करने...

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फूट्या करम फकीर का भरी चिलम ढुल जाए- बचपन के किस्से, विजय सिंह जी के साथ

गांव मे एक घर फकीरों का था । गफूर चार भाईयों में सबसे छोटा था । तीन बडे भाईयो की शादी हो गई थी परन्तु गफूर का घर अभी तक नहीं बसा था ।...

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डॉ किरोड़ीलाल को समर्पित अल्फाज

क्या लिखूं क्या क्या लिखूं,मुद्दा अगर एक हो तो वह लिखो बातें अगर एक हो तो मैं लिखूं, हर पल संघर्ष है हर पल कुछ नया है ,उसके बारे में क्या क्या लिखूं  अगले...