क्या आपको भी ऐसा लगता हैं कि इस तरह चलता रहा तो, 2018 में मीणायो का डिब्बा गोल हैं !

आज मेरा समाज शून्यकाल में हैं समाजहित में सोचने वालों का भारी अकाल हैं। आजकल तो हमारे युवा भी राजनैतिक गुलाम हैं, फिर हमारे पंच पटेलों भी क्या उम्मीद हैं।…

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