Category: पद-दंगल

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मीणा लोक-साहित्य की लोकप्रिय विधा-मीणावाटी गीत.. सबसे निराले हैं ये आदिवासी गीत

मीना लोक साहित्य—- वृहद विस्तार क्षेत्र गायन की स्वतंत्रता, लिंग-भेद का अभाव, प्राचीनता, सर्वत्र प्रचलन, सार्वकालिक,प्रेमाभिव्यंजना के आधिक्य एवम् मीणाओं के पर्याय आदि गुणों एवम् विशिष्टता के कारण आज मीणावाटी गीत लोकप्रियता की दृष्टि...

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‘बाल विवाह अभिशाप है’

‘बाल-विवाह’ पर लिखी गई एक छोटी सी पद रचना आपके समक्ष प्रस्तुतु कर रहा हूँ। उचित प्रतिक्रिया जरूर दे । *****( पद- राजेश मीना नारौली डाँग )**** हाँ रे__ लौहड़ी सी को ब्याब कियो...

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मीना लोक गीतों में पति पत्नी में हास परिहास

मीना लोक गीतो में पति-पत्नी में हास- परिहास- उपालभ्य— पति -पत्नी गृहस्थ जीवन रुपी रथ के दो पहिये हैं अतः इनमें सांमजस्य रहना बहुत जरुरी हैं । इस हेतु दोनों में हास-परिहास, रुठना-मनाना, उपालभ्य...