हमारे बुजर्गो की आवाज सबके लिए शिक्षा

हकीकत-ए-दास्ताएँ #हमारे_बुजर्गो_की_आवाज। हम सबके लिए #शिक्षा।
:::::::::::कलयुग की लीला::::::::::::
सभी समाज के प्यारे छोटे बड़ें भाई-बहनों को राम राम।
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अब ये प्रथम सारदा मात के,और चरणन् शिष नवाएँ;
ओर लेऊ लेखनी हाथ में तो कविता करू बनाऍ,
जे भूले अक्षर दास को दिजे तुरुरत बतायें।
दास जानके सारदा मेरे लेखनी/कण्ठ विराजों आज!

हे सज्जनों ये लेख आज के आधुनिक युग के ऊपर है,आप ध्यान देकर पढ़े;

बुराई के साथ साथ और ये शिक्षा भी है. कि ऐसे काम नहीं करने चाहिए ।हम देखते है कि सभी गाँवों मे जगह अलग-अलग हैं,लोग सब एक जैसे है।आज समाज में परिवर्तन हो रहा हैं,समाज के भाई बहीन सभी क्षेत्रों में बढ़ रहे हैं.बहुत कुछ बदलाव हुआ है.
आज हम सभी इस समाज के मंच से जुडें हैं.यहाँ सभी छोटे बड़े क्षेत्रों से जुड़ाव विधार्थी,महीला,बुजर्ग जुड़े हुए हैं. जिस तरह से नैतिकता को देखते है. चाहे वो समाज का मंच हो या फिर हम सबके गाँव उनके वातावारण का स्वरुप कुछ् अच्छाई है,तो कुछ बुराई है। समय के अनुसार चीजों में परिवर्तन हो रहा हैं।

ये समय बड़ी बलवान है. और समय समय कि बात, कोई समय पे दिन बड़े तो कोई समय पे रात।
भाई देखों निगा पसारके,ओर भये हाल वेहाल;
और व्याप रहों संसार में तो कल युग कठिन करार।

ऐसे अधम् मनुज खल; सतयुग त्रैता युग नाएँ;
द्वाआपुर कु छ झुड़ वहू, होवई कलयुग मॉए ।

भाव न्याय हदय नहीं,और न ही तनीक विश्वास;
या! कारण सारे दूखी सूखी राम के दास ।

आज के समय पर क्या हो रहा है, आपसको भाव गयों; पंचन को न्याय गयों दया धर्म दान पुन चित विष से विसरायों हैं.(इसे अन्यथा ना ले।)
रामामण कथा,वेद,शास्त्र में न ध्यान देवे तेरी-मेरी करवे को चॉव बड़ो हैं, घर न काम करे ; रामजी से नाही डरे, और को सुधाऱ आपना विगाडें है.
क्या कहु बात भैया कल युग मे कही नही जावे; कलयुग को धर्म कर्म न्याड़ो है।
आज क्या होता है. पहले कहते थे भाई बनदों में प्यार होना चाहीएं लेकिन वो भाई बन्द बाला काम अब सफ़ल हो गया हैं,पहले तो भाई चालू थे अब बन्द हो गये हैं,

समय देख के चालीये सतगुरू की सिख समय राज करवाये दे तो समय मंगा दे भिख है, नर्प हो जावे भिखारी
जोगी भोगी हो जाये तो कही ब्रह्यचारी!
ज्ञानी नर मुर्ख होय तो मुढ़ मर्ख धारी; समय खोटों आगया भैया- झुठे कर रहे मोज डुब गई सांचे कि नईयाँ ।

समाज मे बदलाव तो आ रहाँ है पर संचाई कितनी है. इस लेख जो पहलू दिये उन्हे देशकाल या अपने वातावरण आप लागू कर सकते हैं।यह लेख हमारे सभी बुजर्ग आत्माओं को समर्पित हैं।
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लेख मे कुछ गलती हुई हो तो माफी चाहता हूँ।
आप को बहुत बहुत धन्यवाद! लेख को पढ़ने के लिए ।
#राम_राम!राधे राधे!
By-#RAGHAV_SARKAR

आगें की हकीकत अगले अंक में।

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