भ्रष्ट व अनैतिक अफसरशाही व उनके पोषकों द्वारा समाज में लोकतांत्रिक व्यवस्था की हत्या !      #MyMumbaiDiary

मुम्बई मीणा समाज के लिए इस रविवार’ 26 November 2017 का दिन काफी #दुर्भाग्यपूर्ण रहा। दो वर्ष बाद घोषित आदिम जाति मीणा विकास एसोसिएशन, मुम्बई (रजिस्टर्ड संस्था) के तथाकथित चुनाव के दौरान घटिया राजनीति, भ्रष्ट व अनैतिक तत्वों का बोलबाला, बहुमत को अंगूठा दिखाना, चुनिंदा अफसरशाही तत्वों व उनके चापलूसों द्वारा नई कमिटी को अलोकतांत्रिक तरीके से गठन की कोशिश करना, इत्यादि बखूबी देखने को मिला हमें। 

” चुनावी प्रक्रिया के दौरान निवर्तमान (outgoing) अध्यक्ष, जो कि भारत सरकार के अधीन एक जिम्मेदार व इज्जतदार Commissioner पद पे भी हैं, के ये बयान व हरकतें अचंभित करने वाली लगीं : 

  1. अध्यक्ष व सचिव पद पे सिर्फ क्लास वन अफसर ही होने चाहिए।
  2. अध्यक्ष पद पे विभिन्न दावेदारों में असहमति होने के बावजूद लोकतांत्रिक प्रक्रिया द्वारा आंतरिक चुनाव नहीं होने चाहिए, चाहे इसके लिए मौजूद अधिकाँश सदस्य चुनाव के पक्ष में ही क्यों न हों। 
  3. उपस्थित बहुसंख्यक सदस्यों की बात मानकर मुम्बई मीणा समाज को किसी भी सूरत में “दिल्ली मीणा समाज” नहीं बनने देंगे।
  4. अधिकाँश मौजूदा सदस्यों द्वारा जब चुनाव प्रक्रिया को लोकतांत्रिक बनाने की बात उठी तो दोनों पदाधिकारियों (निवर्तमान अध्यक्ष व उपाध्यक्ष) ने चुनाव प्रक्रिया का #बहिष्कार करते हुए उठकर सभा से बाहर निकल गए।
  5. जब इन दोनों महानुभावों से नीचे के ओहदों वाले दो सदस्यों के लिए उपस्थित जनसमूह ने बहुमत से अध्यक्ष पद की दावेदारी की मांग की तो इन दोनों महाशयों ने अपने चुनिंदा चहेतों के साथ मिलकर पूरी चुनाव प्रक्रिया को ही रद्द करवा डाला। बाद में खुद के समर्थकों द्वारा नामांकित चुनाव अधिकारी के मार्फ़त वापिस निवर्तमान कार्यकारिणी के घटकों को ही अगले एक और वर्ष के लिए अध्यक्ष, महासचिव, उपाध्यक्ष, इत्यादि मनोनीत करवा लिया।
  6. अध्यक्ष महोदय ने समापन के वक़्त बड़े #तानाशाही व रौबदार अंदाज में ये कहा कि वर्तमान कमिटी में जो भी व्यक्ति हमें पसंद नहीं करता हो वह इस्तीफा दे दे। “

ज्ञातव्य रहे की वर्ष 2015 नवम्बर में हुई मीणा समाज, मुम्बई की कार्यकारिणी (जो कि पहले मात्र एक वर्ष हेतु ही गठित होती थी) के चुनाव के दौरान भी कुछ ऐसी ही धांधली की पुरजोर कोशिश हुई थी। वर्तमान अध्यक्ष के नेतृत्व में कथित रूप से कब्जाई गयी उस वक़्त की नयी कार्यकारिणी में सबसे गौर करने वाली लेकिन अफसोसजनक बात ये रही की चौकीदार, पड़िहार, दक्षिण व पश्चिमोत्तर राजस्थान, महाराष्ट्रियन, इत्यादि मीणाओं को जानबूझकर बाहर रखा गया। इनके प्रतिनिधित्व का ध्यान पहले की कार्यकारिणियों में यथासंभव रखा गया था। वर्तमान कार्यकारिणी के तब चुनाव व सत्ता हस्तांतरण के ठीक पहले इनके प्रयत्नों से कार्यकाल को एक से बढ़ाकर दो वर्षों का किया गया, जिसका आज तक कोई औचित्य समझ नहीं आया।
यहां आपको मैं ये भी बताना आवश्यक समझता हूँ, ठीक उसी दिवस, चुनाव होने से कुछ घंटों पहले, मैंने समाज के सदस्यगणों से लिखित में (सोशल मीडिया के माध्यम से) आग्रह किया था कि किसी भी ऐसे व्यक्ति को मीणा समाज का अध्यक्ष व महासचिव नियुक्त न किया जाए जिसपे #भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में लिप्त होने की शंका में #विभागीय अथवा #CBI कार्रवाई हुई हो, जांच चल रही हो। 

। मेरे इस प्रतिवेदन के पश्चात भी लोगों ने उस वक़्त मेरी बात पे ध्यान नहीं दिया, बल्कि #साहब के चुनिंदा चहेतों ने मुझपर और कुछ न लिखने -करने का दबाव डाला।

तत्पश्चात एक #सुनियोजित/पूर्वनियोजित रणनीति के तहत इन्हीं लोगों ने समाज के अध्यक्ष पद पे एक ऐसे व्यक्ति का चयन (चुनाव नहीं) किया जिनको कुछ वर्षों पहले July’2011 को CBI द्वारा भ्रष्टाचार के आरोप में रंगे हाथों लाखों रुपये नगद के साथ पकड़े जाने के मामले में आरोपी बनाकर जेल में भेजा गया था। अब भी शायद इनपे CBI व विभागीय कार्रवाई जारी है। बात यहीं खत्म नहीं होती। अध्यक्ष पद पे इन श्रीमान की नियुक्ति के कुछ माह पश्चात फरवरी’2016 राजस्थान के प्रमुख अखबारों की सुर्ख़ियों में इन महाशय को लेकर एक खबर प्रकाशित हुई, लिखा था कि किसी महिला ने (कथित रूप से जिसके साथ काफी समय से इनके अंतरंग सम्बन्ध थे) इनके खिलाफ IPC 376 में बलात्कार की #प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई है। अब ऐसा सुनने में आया है कि इन्होनें शायद उस मामले में समझौता (compromise) कर लिया है। 

आश्चर्यजनक, परंतु अफ़सोस इस बात पे है कि इतना कुछ घटने के बाद भी आज ये महाशय मीणा समाज के सर्वोच्च पद (अध्यक्ष) की कुर्सी पे विराजमान हैं, और अब भी उसे छोड़ने को राजी नहीं। दुर्भाग्य इस बात का है कि समाज के ही कुछ लोग इतना जानते हुए भी मूकदर्शक बने रहे हैं। किसी ने भी उन्हें समाज की इस संस्था के सर्वोच्च पद से इस्तीफा देने की बात कहने की हिम्मत नहीं की।
मेरा ये लेख स्वयं के अनुभव, कई श्रोतों से प्राप्त पुख्ता जानकारी व मौजूद साक्ष्यों व अन्य गवाहों द्वारा दर्ज (#recorded) की गई बातों के आधार पे लिखा गया है। इसका मक़सद किसी को भी व्यक्तिगत तौर पे हानि पहुंचाना बिलकुल नहीं, किसी का #चरित्र हनन (character assasination) करने की कोशिश नहीं है। मेरा मकसद हमारे समाज की संस्थाओं के सर्वोच्च पद की गरिमा की रक्षा करना है। साथ ही समाज के वृहत्तर हित में चौतरफा व्याप्त गंदगी को समाप्त कर स्वच्छता लाना है, नकारात्मक #तानाशाही को ख़त्म करना है ताकि सभी #सज्जनों व सच्चे समाज सेवियों को आगे लाकर ऐसे लोगों के खिलाफ एकजूट कर आवाज उठाया जा सके जिससे समाज #मज़बूत बने, उसमे #एकता स्थापित हो। इन सबके बावजूद अगर किसी को भी व्यक्तिगत तौर में मेरे उपरोक्त लेख से दुःख व आघात पहुंचता है तो मैं उसके लिए क्षमाप्रार्थी हूँ। 
#nc69

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