किसान की मूँगफली, टाइम पास मूँगफली

किस्सा मुँगफ़ली का

मुँगफ़ली को गरीब की बादाम कहा जाता है.. यह रेतीली मिट्टी मे बहुत अच्छी होती है.. लगभग 20 साल पहले तक #आंतरी क्षेत्र भी मुँगफ़ली का बहुत अच्छा उत्पादक माना जाता था..

बुजुर्गों के अनुसार यह सबसे अधिक बोई जाने वाली फसल के थी.. बाजरा ओर मोठ इसके साथ बोई जाने वाली दूसरी फसल थी..

मुँगफ़ली के लिए सबसे घातक सिद्घ हुआ ऐक कीड़ा जो रेंग कर चलता है ओर जमीन के अंदर पाया जाता है… जिसको स्थानीय भाषा मे लट कहा जाता है… यह कीड़ा ऐक उड़ने वाले किट से पेदा होता है… यह किट भी इतना खतरनाक होता है कि पेड़ो के पत्ते ही नहीं उनकी छाल तक को खा जाता है…

तकनीकी विकसित नहीं हुई थी तब मुँगफ़ली की खुदाई फावड़े से की जाती थी जो लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रिया थी… मुँगफ़ली को पत्तों से अलग करने के लिए ऐक लकड़ी का प्रयोग किया जाता था जो जेलया कहा जाता था… मुँगफ़ली खाने… तेल निकालने ओर सब्जी बनाने के काम आती है..

शायद ही मुँगफ़ली के बराबर कोई ओर फसल रोजगार देती होगी… जिस मुँगफ़ली को किसान 20-30 रुपये किलो बेचता है वह बस ओर ट्रेन मे 100-200 रुपये किलो तक बेची जाती है.. #टाइम #पास #मुँगफ़ली.. यह शब्द हर जगह सुनाई देता है .. चाहे कही भी चले जाओ.. अमीर हो या गरीब मुँगफ़ली ओर गुड का स्वाद लेता हुआ मिल जाएगा….

मुँगफ़ली के उत्पादन में पचवारा का अब भी अग्रणी स्थान है… अब हमारे क्षेत्र में यह फसल ज्यादा नहीं बोई जाती है लेकिन जब भी घर जाते हैं.. मुँगफ़ली सेक कर परिवार के साथ खाने ओर चर्चा करने का आनंद लेते है…अगर मुँगफ़ली सेकने के लिए आग जलाई जाए तो पड़ोसी भी शामिल हो जाते है…. मुँगफ़ली अब किसान के लिए घाटे का सोदा बनती जा रही है… इसमे लगने वाले कीड़े के लिए बहुत सी दवाइयां आई है लेकिन ज्यादा असरदार नहीं हुई है….
क्या आपका क्षेत्र मुँगफ़ली उत्पादक है… अन्य राज्यों मे मिलने वाली मुँगफ़ली हमारे क्षेत्र की मुँगफ़ली से किस तरह भिन्न है

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