‘बाल विवाह अभिशाप है’

बाल-विवाह’ पर लिखी गई एक छोटी सी पद रचना आपके समक्ष प्रस्तुतु कर रहा हूँ। उचित प्रतिक्रिया जरूर दे ।

*****( पद- राजेश मीना नारौली डाँग )****

हाँ रे__ लौहड़ी सी को ब्याब कियो ,महतारी बैरण होगी रे ….अरर__ पँडित पाड़े रे भमरिया ,

लाडी सोगी रे ….

ऐ जी..कौन जन्म को बदलो लीनो ,पूँछत सुता बता दे री मैया ….

काहे कु बाबुल बदला फाड़े ,क्यूँ बिछड़ाये सखी और भैया ।बेटी कु परायो धन समझे ,

क्यूँ जन्म दियो तूने मोय मैया …काहे कु ममता कि कोख लजायी ,

क्यूँ बेटी से प्यारो लगे तोय छैया ।।

हाँ जी तो__ छोड़े मैया बाप ,

त्जों मैंने झूलो बाड़ा को ….

बाबूल सँग सहेल्याँ रोवे नीम गीराड़ा को .रे…लोहड़ी सी ब्याब कियो …..

 

हाँ रे__ सरकारी कानून उम्र ’21-18′

शादी की ….

अरर__ शादी बाल पणाँ में जड़ है घर बरबादी की….

अरे ओ__बाबुल तोय तनिक शर्म नही आयी…

पढती लिखती नाम कमाती ,

क्यूँ बालक परणाई ।

बणी मैं 6 छोराँ कि माई ….

बाल पणाँ में आयो बुढापो ,

कदे न जवानी आई ।।

हाँ जी तो__कमजोरी को डील ,

मिल्यो नहीं लपटो जापा को ….

उम्र 17 साल लगे मेरो बदन बुढापा सो रे…सरकारी कानून उम्र ’21-18’……

 

हाँ रे ___आगी आखातीज गाँठ, पल्लाँ

में दे लो भाई रे …..

छोटा बालक को मत कर ज्यो , ब्याब

सगाई रे ……

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