जातीय जनगणना

2011 में जब जनगणना हुई थी तब जातीय आंकड़े भी जुटाए गये थे। लेकिन 4 साल बाद भी मोदी सरकार इनको उजागर नहीं कर रही है। इसका मकसद सूचनाओ को एकत्रित करके, सार्वजानिक करना था और इसको उन जातियो की आर्थिक, सामाजिक , विकास के लिए योजना बनाना था । सरकार द्वारा जानबूझ कर इनको सार्वजानिक नहीं किया जा रहा । ये सब वोट बैंक की राजनीती तो नहीं है।

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