भारतीय संविधान की आदिवासियों के लिए महत्ता 

भारत के #आदिवासियों के लिए #पोराणिक और धार्मिक ग्रन्थ इतना महत्त्व नहीं रखते, जितना महत्त्व संविधान रखता है | जिसने #पशुतुल्ये नारकीय जीवन से निकालकर मानवीय #गरिमा के मूल #अस्तित्व की #पुनर्स्थापना की |एससी/एसटी/ओबीसी व स्त्री जगत के लिए यह एक #नायब तोहफा है | हमारे लिए यह एक पवित्र #ग्रन्थ से कम नहीं पर #पीढियों की सामाजिक और धार्मिक #गुलामी के कारण न हमे इसका #ज्ञान है, और न ही अब तक इसका #महत्त्व समझ पाए | यही कारण है की जिनके ग्रंथो के कारण हम #गुलाम बने है, उनका दिन रात #गुणगान करते है और वो ग्रन्थ घर में #थोक के भाव उपलब्ध है पर गुलामी की #बेडियो से #मुक्ति दिलाने वाले इस #महान ग्रन्थ का घर में मिलना असंभव है |

आदिवासी/दलित/पिछड़े समुदाय के हितों की रक्षा और उनके लिय किये जाने वाले #संघर्ष के लिया #प्रथम आवश्यकता उनके सम्बन्ध में बने #संवैधानिक व क़ानूनी प्रावधानों की जानकारी होना है इसके बिना संघर्ष का कोई #ओचित्य नहीं यह #जानकारी देता है हमारा सविधान ,संविधान में अनुसूचित जाती,अनुसूचित जनजाति, और अन्य पिछड़ा वर्ग से सम्बंधित कई #प्रावधान है | यहाँ आदिवासियों (अनुसूचित जनजातियो ) के लिय बने #प्रावधानों की चर्चा करेंगे | इन्हें मुख्यत दो भागो में बाटा जा सकता है :- 1-सुरक्षा तथा 2-विकास के लिय बहुत ही आवश्यक है – #सुरक्षा सम्बन्धी प्रावधान संविधान के #अनुच्छेद -15(4),16(4),19(5), 23,29,46,164, खंड-10-244, 244 क, 243घ, 330,332, 334,335, 338, 339,(1),366 (24), 366(25), 371(क), 371(ख)371(ग), 340, 341,342 पांचवी अनुसूची-पैरा 3,4,5 तथा छठी #अनुसूची में निहित है | अनुसूचित जनजातियो के #विकास से सम्बंधित प्रावधान मुख्य रूप से अनुच्छेद-275(1) प्रथम उपबंध तथा 339(2) में निहित है | आज 26 नवम्बर को संविधान दिवस है यह सम्पूर्ण #शोषित समाज के लिए #महत्वपूर्ण दिवस है | सभी को हार्दिक बधाई !!-पीएन बैफलावत (26-11-17)

Facebook Comments

Leave a comment