मैं छोटे छोटे सपने देखता हूँ, बड़े सपने देखकर अपनी आँखें क्यो बोझिल करू..

मुझे छोटे-छोटे सपनो को चुनने की आदत है इसलिए मैंने बड़े सपने देखकर आँख को कभी बोझ नही दिया।मेरे बड़े लोग आदर्श भी नही रहे है।महात्मा गाँधी,महात्मा बुद्ध,अकबर,राणा प्रताप,नेपालियन ,हिटलर न जाने इतिहास के कितने पात्रो को पढ़ा जरूर है।कभी उनके रास्ते चल नही पाया।ना ही ज्यादा सीख पाया।
छोटे सपनो की तरह हमेशा मेरे अनुकरणीय व्यक्ति महान नही है। महेंद्र सिंह धोनी, एक ऐसा खिलाड़ी जो सुख-दुःख में मग्न रहता है।वर्ल्ड कप जीतने पर खुशी के अहंकार झूमा नही और पाकिस्तान से हारने पर फुट-फुट के नही रोया।आज छोटे शहर का लड़का बड़े देश का नेतृत्व कर रहा है।उसने कभी सोचा नही अपना बैटिंग आर्डर थोड़ा ऊपर किया जाए।लेकिन क्रिकेट इतिहास में ख़ुद को बहुत ऊपर ले गए।धैर्य,विन्रमता,विवेक और विपरीत परिस्थितियों लड़ना धोनी से सीखा है।लीडरशीप की अद्भुत क्षमता शायद अकबर में नही रही होगी।धोनी मेरे लिए सदा अनुकरणीय रहे है जबकि मैं क्रिकेट खेलता नही सिर्फ देखता हूँ।
आनदं कुमार ,सुपर 30 के संस्थापक।शिक्षक के लिए हमेशा दिल से सलाम उमड़ता है।मेरा प्रिय जॉब है।आनन्द सर को नमन।

रवीश कुमार,हिंदी मिडीया की बेबाक आवाज है।अंग्रेजी ने बहुत सताया है।रात को सपनो में महबूबा की जगह अंग्रेजी आती रही।जब टीवी स्क्रीन से नफरत होते लगी है फ़िर हिंदी मिडीया में रवीश को सुनना अच्छा लगता है।

खिलाड़ियों की तरह सभी कलाकारो का दिल से सम्मान करता हूँ।लेकिन छोटे शहरों के कलाकारों ने मुंबई नगरी में ख़ुद को स्थापित किया है कंगना रानौत, नवाजुद्दीन सिद्क्की, इरफ़ान सर भी बहुत पसंद आते है।

आज़ादी से पहले युवा पीढ़ी विवेकानंद को प्यार करती हैं उसी तरह आज़ादी के बाद क़लाम साहब से प्यार करती है और मैं भी उन्ही युवाओ में हूँ।

कवि या लेख़क, चाहे किसी भी भाषा का हो।सबको पढ़ना अच्छा लगता है किसी एक-दो चयन करना बहुत मुश्किल है।मुझे छोटे सपने चुनने की आदत है।

Facebook Comments

Leave a comment