YOUth decide “the climate,the vote,the future..

मुल्क में युवाओं की आबादी सर्वाधिक है..
हमारे समाज और इस ग्रूप में भी युवाओं की संख्या सबसे ज़्यादा है।सबसे ज़्यादा का मतलब मैक्सिमम…।किसी भी समाज और देश के लिये युवाओं का हुनर और उनकी क्षमता तरकस में रखे उन ताक़तवर बाणो की तरह है जिन पर तरकस को धारण करने वाले को इतना विश्वास है कि वो उनके दम पर किसी को भी चुनौती दे सकता है।विश्वास उन बाणो पर तब भी होता है जब वो इस्तेमाल नही होते है…लेकिन जब उन्हें इस्तेमाल करने की बारी आती है तो विश्वास को विजयी बनाने में उनको अपना शत प्रतिशत देना पड़ता है जिनके लिए वो जाने जाते है।ठीक इसी तरह हमारे समाज का युवा भी समाज के मज़बूत कंधो पर बँधे तरकश में शामिल उन बाणो की तरह ही है।समाज को इस ताक़त और क्षमता पर विश्वास है…समाज जानता है कि उसकी ताक़त और क्षमता कभी हार नही संकती है…और इसी सोच के बलबूते वो चुनौती देता है ….सामने आने वाली हर मुसीबत और परीक्षा को ।जो भी समाज इस परीक्षा में सफल हो जाता है उसका भविष्य संभावनाओं से भरा होता है..उसकी पहचान उसके समानांतरो में सबसे अलग होती है।उसके इर्द गिर्द उसको पूछने वालों का मैला होता है…एक अभिव्यक्ति उभरती है…जो समाज की सार्वभौमिक मौजूदगी दर्ज कराती है।इन सबके पीछे जिस विश्वास का हाथ होता है वो युवा कहलाता है।युवा का मतलब शारीरिक ऊर्जा और ताक़त के साथ साथ अभिव्यक्ति और सृजनता का संगम भी होता है।

युवा त्वरित निर्णय लेने के लिये जाना जाता है…युवा समाज का क्लाइमट डिसाइड करता है।युवा हवाओ की दिशा तय करता है…युवा ही तय करता है की उसके समाज का ऊँट किस करवट बैठेगा।

आज हमारे देश में कुछ राज्यों में युवा ताक़त ने अपनी एक अलग पहचान अपने समाज की दर्ज करवाई है…युवा अपने समाज के नाम को नैशनल स्तर पर पहचान दिलाने में क़ाबिल हो रहे है…वो राजनीति के मापदंड तय कर रहे है।हमारे समाज में भी युवा ताक़त वक़्त आने पर समाज का भविष्य तय करेगी ।अपनी बहुआयामी सोच द्वारा
हर एक क्षेत्र में रेड कॉर्पेट पर समाज की वॉक करवाने में अभी तक कोई कमी नही छोड़ी गयी है..और यही बाण जो अब तक तरकश से निकल कर उपलब्धियों के रूप में अपनी धाक जमा चुके है…वो शेष पड़े नव तीरों को प्रेरणा देंगे।अधिकांश युवा शक्ति वर्तमान में किताबी दुनिया से रुबरु हो रही है…ये आवश्यक है कि रूबरु होते समय किताबों के सागर में गोता लगाती रहे जिस से जीवन में सफलता के रूप में मोती प्राप्त हो सके।युवा ऊर्जा को सही दिशा में लगा कर ख़ुद के पाँवो पर खडे होकर समाज को खड़ा किया जा सकता है…।
व्यापार,खेल,संस्कृति,कृषि आदि बहुत से क्षेत्र है जिनमे युवा शक्ति अपने हुनर का विनिवेश कर रही है।लेकिन अभी भी एक बहुत बड़ी तादाद ऐसे युवा साथियों कि है जो अभी भी अपनी आंतरिक निपुणता का प्रयोग नकारात्मक तरीक़े से कर रहे है..किसी को भी नीचा दिखा कर स्वयं की जीत समझना इनका दस्तूर हो गया है,ये इस दशा में ये भूल जाते है की हमने किसी महिला का अपमान कर दिया,किसी अधिकारी और नेता में ख़ुद के स्तर पर ही प्रतियोगिता करवा देना..जिसमें शब्दों की गरिमा कितनी गिर जाती है..उसका अगर पैमाना हो तो पता लगाया जा सकता है।लेकिन नकारात्मक ऊर्जा इतनी फैल जाती है की पैमाने का मीटर भी टूट जाता है।युवा शक्ति को ये सब मीटर और रिकोर्ड अपनी सकारात्मक ऊर्जा के साथ समाज के हित में तोड़ने चाहिये। अगर समस्त युवा शक्ति अपनी पूर्ण भूमिका समाज
के लिए अदा करेगी तो वास्तव में हमारा समाज
आर्थिक ,सामाजिक,सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप से विशाल जोन होगा जिसमें सर्वाधिक पूँजी युवाशक्ति की होगी।आइये युवा साथियों हम अपनी असल ऊर्जा को की पूँजी बनाये।

दीवारों को परदों की तरह हिला देते है,
युवा रेगिस्तान में भी सुमन खिला देते है……

-शेखर मीणा

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