क्या आपने भी झेला हैं जातिभेद का दंश- MeToo

“जातिभेद “यह एक ऐसी समस्या है जिसका उचित समाधान नही हो पाया है
मै जब दो साल की थी ग़रीबी की वजह से गांव छूट गयातब हम रहे जनरल वर्ग के साथ 8/9साल के हुए महावीर जी (कमला बाई) होस्टल में रहे 10th के बाद फिर से गंगापुर सिटी और दोस्त ऐसी सुशीला वर्मा(वैरबा) मन्जुजैन, आभाशर्मा , रजनी सिंहल, शशी कल्पना,बिन्दल, तारागुप्ता,अनितागोयल, मुमताज बानो, रखिया, संगीता रावत, हम और भी कितनी ऐसी दोस्त थी
यकीन कीजिये मुंह से निवाला छीन कर खा लेते थे। एक दूसरे का।

अग्रवाल कालेज से PG( post graduation complete ) की सबके सब व्यसक तब तो ये जाति भेद सुनने मे नही आता ,इसे कौन फैला रहा है क्या रीजन है
जो दिन व दिन वैमनस्यता बढ़ती जा रही है।
इसके पीछे बडा कारण राजनीति तो नहीं ?
कुछ यानि10% लोग जिम्मेदार है हरेक बुराई को फैलाने के लिए ।

ऐसा भी नही है वो एक जाति बिशेष है वो हरेक जाति मे है जो उकसाते है हम उन्हे पहचाने और सही राह पर लाने की कोशिश करे और समाज से लेकर राष्ट्र तक उन्नति, प्रगति में बाधक इस बीमारी को दूर करने मे सहायक बने।

Most important —आधुनिक युग में सबसे बड़ा पाखंड है तो वह है जातिवाद। इससे बचे और मानवता अपनाये । एक दूसरे के सुख दुख बांट।यदि किसी को कोई भी problem हुई है तो sorry.

लेखिका वरिष्ठ आदिवासी साहित्यकार और समाजसेवी विमला मीणा हैं

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