एक गरीब परिवार से निकला बेटा बना JNU की पहचान

#गंगासहाय #मीणा #समाज #का #गौरव
#भाग -1
गंगापुर के पास में सेवा गांव से बहुत ही साधारण ग्रामीण मीणा परिवार से एक हीरा निकला जिसका नाम गंगासहाय मीणा है ।
उसके जीवन को लेकर एक लंबी पोस्ट लिखने जा रहा हूं जो कई भागों मे डाली जाएगी… आप सभी से निवेदन है कि सभी भागों को पढ़े ओर अपने बच्चो को और आने वाली पीढ़ी को प्रेरणा के स्त्रोत के रूप मे सुनाए…
यह कहानी प्रो. गंगा सहाय मीणा के जीवन पर अधारित है उम्मीद करते हैं कि आप सब को पसंद आएगी

इसके भाग को पोस्ट के रूप मे डाले जाते रहेगे..
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गंगा… गंगा… बड़ी बहिन गंगा को आवाज लगा रही है… वह अपने छोटे भाई को ढूंढ़ रही है जो उससे शायद 2 साल बड़ा है… आज मैंने खेलने के लिए एक गेंद बनाई है… जीजी के कुछ फटे कपड़ो से हम आज लकड़ी से गेंद को मार कर खेल खेलेंगे ..
बहिन- क्या हमारे पास सचमुच की असली गेंद कभी नहीं होगी
नहीं भाई ऐसा नहीं है जब आप बड़े हो जाओगे , पढ़ कर नोकरी लग जाओगे तब हमारे पास असली की गेंद होगी ।
बहिन नोकरी कैसे लगते है
भाई जो अच्छे से पढ़ते हैं तो सरकार उनको नोकरी देती है और पैसे भी देती है
कितने पैसे देती हैबहन
भाई बहुत सारे देती है
हम इतने पैसे का क्या करेंगे..
मुझे क्या पता काका से पूछेंगे अब चलो खेलते हैं….
आज मेरा मन नहीं है मुझे पढ़ना है , नहीं भाई मैंने आपके लिए गेंद बनाई है थोड़ी देर खेलते है…. क्या खेलना है यह डंडा है जिसको गेंद से मारना हैऔर मैं गेंद को आपकी तरफ मारती हूं आप मेरी तरफ मारना ।

जो चूक जाएगा वह हार जाएगा
अगर किसी के द्वारा गेंद खो दी जाएगी तो वही नई गेंद बना कर लाएगा….

थोड़ी देर खेल के बाद थकान होने लगी… गंगा की रुचि खेलने मे ज्यादा नहीं थी सो थक कर बेठ गए बहिन भी अब बाड़े मे जानवरों को चारा डालने जा चुकी थी गंगा विचारो मे खोया हुआ था ।
अगर मेरी नोकरी लग गई तो बहुत से पैसे होंगे एक असली वाली गेंद लाऊंगा , घर भी पक्का बनवा लेंगे…

एक साइकिल भी होनी चाहिए… यह सब तो लेना हैं ।
लेकिन सबसे पहले काका के लिए अच्छे बैल लाऊंगा बैल की बजाय ट्रैक्टर ले आए तो अच्छा रहे… लेकिन मुझे पता नहीं है… नोकरी कब लगेगी ओर कितने पैसे मिलेंगे और ट्रैक्टर तो बहुत पैसे का आता होगा । आज भाई से बात करूंगा , इन विचारो में उलझे हुए गंगा पढ़ाई करने लगा सर्दियों के दिन अभी नहीं आए थेl

खेती का काम चल रहा था जीजी भाई ओर पापा खेतो पर काम करने गए है… बहिन भेंस को चारा पानी के लिए ओर गंगा पढ़ाई करने के लिए घर पर रुके हुए थे ।
गांव के बच्चे खेल रहे हैं और पेड़ों पर चढ़े हैं मन हुआ चलते है… लेकिन नोकरी वाली बात दिमाग मे घर कर गई थी ।
नहीं मुझे ज्यादा से ज्यादा पढ़ाई करनी चाहिए आज काका से बोल दूँगा केरोसिन ज्यादा रखे मैं रात भर पढ लूंगा चिमनी से पड़ना थोड़ा कठिन है , लेकिन पढना चाहिए
आगे की कहानी अगले अंक मे

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