हम सबकी सोच- समाज के भविष्य का सुंन्दर निर्माण

आज बात शिक्षा के ऊपर ।
किसी भी समाज या देश का निर्माण उसकी शिक्षीत नागरीको के ऊपर तय होता है,उस देश कि शिक्षीत जनत्ता तय करती है.उसका भविष्य किस तरफ लेजाना हैः आज के वर्तमान स्वरूप को देखने पर शिक्षा के स्तर बहुत खराब स्थति में है. सरकार के आकड़े उठाले चाहे,संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े लेने पर साक्षरता दर, जिसमें लगभग पुरूष 78 प्रतीशत है. महिला साक्षरता लगभग 64 प्रतिशत है. आज हमे देश कि आजादी को 70 वर्ष हो जाने के बाबजूद शिक्षा के स्तर का पैमाना पूरा नहीं कर पायें हैं, एक विवेक शील समाज की सोच समझ के# स्तर को सन्तुलीत नही हो पाई है.

आज देश के लोकतंत्र देखने पर हम पायगें कि, क्या वाकई लोकतंत्र प्रणाली सूचारु रूप से काम कर रही है. लोगों के विचार अलग अलग हो सकते हैं.पर हकीकत कुछ और हैं।

शिक्षा का विषय व्यापक है.अगर मीणा आदिवासी समाज की बात करे तो, समाज शिक्षा को लेकर जागरुकता है,साथ युद्ध स्तर पर काम भी हो रहा है.परन्तु ध्यान देने पर हम पायगें कि शिक्षा पाने में एक महत्वपूर्ण रुकावट है गरीबि। आज समाज में प्रत्येक छात्र के माता पिता अपने बच्चे को पढ़ाना चाहते हैं. वह अपने पुत्र और पुत्री को अपने पैरों पर खड़ा होते देखना चाहतें हैं।

आज भारत के आर्थिक क्षेत्र आंकड़ों देखने पर गरिबी रेखा से निचे 5O प्रतीशत जनसंख्या आती है. जिसमें जनजाती वर्ग छोड़कर सिर्फ 21प्रतीशत जनसंख्या वर्ग आते है.भारत कुल आबादी का गरिबी रेखा से नीचे ३० प्रतीशत से नीचे जनजाति समाज आता है. यह जनजाती समाज के लिए दुख: है।

सबसे बड़ी चुनौती समाज में महीला शिक्षा को लेकर है.शिक्षा देने में समाज,माता-पिता और स्वयं शिक्षार्थी के सामने बहुत बड़ी चुनौती है.कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियाँ हैं, सुरक्षा,अच्छा वातावरण,गरिबी,विवाह का दवाव और करीयर कॉऊनसिलींग आदि। ग्रामीण क्षेत्र मे कई सारी समस्या हैं। ऐसा भी नहीं कि महिलाएँ आगे नहीं बड़ी है. आज समाज की अधिकतर महिला अपने सघर्ष और परिश्रम से देश महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सेवा प्रदान कर रही हैं.परन्तु अभि बहुत जरुरत है,सुधार की ।

दुसरी और पुरुष शिक्षा में सुधार काफी हद तक देख सकते है. जिस तरह से समाज में पुरुष शिक्षा के योगदान ने सभि क्षेत्र में अपने लिए दरवाजे खोले हैःऔर समाज के साथ देश के निर्माण और उसकी गतिशीला में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा हैं।
साथ ही ध्यान देने की बात है; चुनौतिं हैं, निजी क्षेत्रों कि तरफ नहीं बढ़ना,करियर कॉऊन.. की,साथ ऐसी कई सारी चुनौती है।
आज हम देखते है कि मीणा समाज ने शिक्षा के क्षेत्र में अपने महत्वपूर्ण कदम बढ़ाये है,समाज को अपनी नई आवाज मिल रही है.शिक्षा ने समाज को परिवर्तनशीलता के साथ एक नई पहचान बनाई है. परन्तु अभी समाज को व्यापक स्तर पर शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रयासरत रहने कि जरुरत है. महिला शिक्षा सुधार के साथ उन से जुड़ी समस्याओं के निराकरण में समाज को महत्वपुर्ण कदम उठानें कि जरुरत है।

I believe in a future where the point of education is not to prepare you for another useless job, but for a life well lived.

कोई समाज सिर्फ तभी विकास कर सकता है,
जब युवा पीढ़ी ऐसी चीजे करे,जिनके संभव होने की उनके माता-पिता ने कभी कल्पना भी नहीं की थी।

By- #RAGHAV SARKAR

Facebook Comments