जरायम दादरसी – आदिवासी मीना इतिहास पर शानदार राजस्थानी फिल्म

लेखक निर्देशक प्रभुदयाल ने अंधविश्वास के खिलाफ संघर्ष पर बनाई राजस्थानी फिल्म जरायम दादरसी 
जयपुर। राजस्थानी सिनेमा में प्रभुदयाल पहले ऐसे निर्देशक बन गये हैं, जो अपनी ही बनाई शॉर्ट फिल्म के सब्जेक्ट पर फीचर फिल्म बना रहे हैं। “जरायम दादरसी” नामक इस फिल्म की शूटिंग हाल ही पूरी हुई है।

अपनी पिछली फिल्म रुकमा राजस्थानी के लिए बेस्ट निर्देशक का अवार्ड पा चुके प्रभु दयाल ने कुछ दिन पहले ही अंधविश्वास के खिलाफ संघर्ष पर एक शॉर्ट फिल्म “जरायम दादरसी” बनाई थी। जब कंपलीट फिल्म बनी तो उन्हें लगा कि इस सब्जेक्ट पर तो फुल लेंथ फीचर फिल्म बनाई जा सकती है। फिर क्या था, उसी कास्ट को फिर से कॉल किया और कर दी तैयारी शुरू। स्क्रिप्ट पूरी होते ही शूटिंग शुरू कर दी। अब शूटिंग पूरी हो चुकी है। जल्द ही इसका पोस्ट प्रोडक्शन का काम पूरा कर लिया जाएगा।

निर्देशक प्रभु दयाल ने बताया कि फिल्म के संवाद सीताराम घुनावत ने लिखे हैं। डीओपी प्रवीण चौहान व गिर्राज मीना हैं। राजू के संगीत निर्देशन में राजू व रामजी देवड़वाल ने गीतों को आवाज दी है। मेकअप मनीषा बेदी का है तथा कॉस्ट्यूम का जिम्मा विशाल ने संभाला है। सूर्यकांत, कजोड़, सीताराम व प्रमोद आर्य सहायक निर्देशक हैं।

फिल्म में राम मानतवाल, मीनाक्षी, अस्मिता मीना, गिर्राज डोभवाल, सिकंदर चौहान, मनीषा बेदी, अशोक ब्याडवाल, गौरी राजपूत, सोनाक्षी ब्याडवाल, छवि घुसिंगा, कजोड़ मीना, जयराम ककरोडा, श्रवण बैनाड़ा, सूरज बैनाड़ा,विनोद झरवाल, योगेश निर्मल, मुकेश घुनावत, विपिन, सुनील, राम शर्मा, आर. सी मीना, संतोष बैनाड़ा, रवि बैनाड़ा, रोहित व हरिराम विभिन्न भूमिकाओं में नजर आएंगे।

साथ ही इसके माध्यम से हम मीणा समाज के असली संघर्ष और संस्कृति से रूबरु होंगे जिसे हम मनुवादियो द्वारा पुरे भारत वर्ष मे आरक्षण के बारे मे मिथ्या फैलाई गई भ्रांतियो कि आरक्षण इंदिरा ने दिया, दस साल के लिए दिया, मीणा को आरक्षण न होकर भील मीणाओ को दिया गया लेकिन ऊपर तंत्र में किसी मीणा अधिकारी ने भील मीणा से कोमा लगाकर मीणाओ को भी शामिल कर लिया

मीना संस्कृति और अंग्रेजी शासन से आजादी के लिए संघर्ष की दास्तान ” जरायम दादरसी” फ़िल्म महारष्ट्र के नागपुर पहुंची। 01 दिसम्बर से रोजाना 1 शो 6 pm , एक सप्ताह तक Jay shree Takies में चलेगी। नागपुर में रह रहे समाज के लोगों की फ़िल्म देखने की प्रबल इच्छा की वजह से यह संभव हुआ। मैं Shri L R Meena, Shri G S Meena  और उनके साथियों का आभारी हूँ। इनके सहयोग की वजह से नागपुर में फ़िल्म लगाना संभव हुआ।  काल सुबह से www.bookmyshow.com par bhi online ticket  बुक करवा सकते है। राजस्थान से बाहर जहा कही भी 100-200 समाज के लोग रहते हो उनकी फिल्म देखने की इच्छा हो तो में ये फ़िल्म वहां लगवा दूंगा। मुझसे संपर्क करे। 1 दिसम्बर से 20 दिसंबर तक कोई बड़ी हिंदी फिल्म नही है इसलिए ये फ़िल्म इस दौरान आसानी से लग जायेगी।

इस फ़िल्म के नाम को लेकर यह कौतूहल है कि इसका नाम #जरायम_दादरसी क्यों है? जिसका जबाब हमें फ़िल्म देखने के बाद अच्छे से समझ आ जाता है। यह फ़िल्म समाज विशेष पर हुए अत्याचार को चित्रित करने के अलावा एक ऐतिहासिक फ़िल्म भी है, क्योंकि इसमें इतिहास के ऐसे पहलू को बखूबी दिखाया गया है जिससे हमारा समाज क्या ज्यादातर समाज , अनभिज्ञ हैं।

इसलिए मैं लोगों से इस फ़िल्म को देखने के लिए आग्रह करता हूँ।

बाकी इस फ़िल्म में 4-5 गाने हैं जो कि सुपर डुपर हिट है

जरायम दादरसी” राजस्थानी फिल्म को मिले अभूतपूर्व उत्साह से मैं अभिभूत हूँ दोस्तों।पहले दिन के 2 शो हॉउसफुल और बाकी के शो भी लगभग हाउस फुल थे। ऐसा शुद्ध बॉक्स ऑफिस कलेक्शन मैने पहले नही देखा। भूतकाल में  राजस्थानी फिल्मो को लोग ट्रेक्टर ट्रोली भर भर कर देखने आने वाली बात यथार्थ होती दिख रही है। फ़िल्म के पहले दिन स्टार कास्ट अस्मिता, राम मीना, अशोक मीना को देखने भीड़ को रोकने में पसीने छूट गए।

फ़िल्म निर्देशक प्रभुदयाल मीना जी को बधाई और शुभकामनाएं देता हूँ।

दोस्तो फ़िल्म जरायम दादरसी आदिवासियों द्वारा अंग्रेजों से संघर्ष की कहानी है ।
गंगापुर और उसके आस पास क्षेत्रवासी फ़िल्म को देखे।फ़िल्म 18 से 23 नवम्बर तक लाल मंदिर सिनेमा में लगी है।

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