जीवन का सबक है मेरा किसान

पहली बार कविता लिखने कि कोशिश की है आप लोगों को पसंद आयेगी या नहीं ..। हौसला अफजाई करना और आपके सुझाव आमंत्रित है

देखता हू जब इन किसानों को मैं अक्सर
तो बैचेन हो जाता हू अंदर से ।
कितने मजबूर होंगे ये बेचारे
जो रातदिन जी तोड़ मेहनत करते है ।।

मैने इनकी आंखों मे हमेशा बैचेनी
बेबसी और मासूमीयत देखी है ।
जब पूछता हू इनसे हाल ए दिल
तो दर्द को मुस्कुरा कर टाल देते है।।

जीवन जीने का सबक तो कोई इनसे सीखे
जो हरपल हरदिन एक आशा के साथ जीते है
फसल होगी मजदूरी मिलेगी तो ये करूंगा वो करूंगा
लेकिन जब फसल चौपट होती है और मजदूरी नहीं मिलती है
तो भाग्य मे ऐसा लिखा है मानकर फिर वहीं काम को बडी शिद्दत के साथ करते है

सुदेश गुरुजी
9571283700

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