गुजरात आदिवासी आंदोलन के कर्णधार छोटुभाई वसावा जीते

गुजरात आदिवासी आंदोलन के कर्णधार छोटुभाई वसावा जीते

आज जारी हुए गुजरात विधानसभा के चुनाव परिणामों में कांग्रेस और बीजेपी की लड़ाई के बीच में एक ऐसा भी शख्स था जो अपने हकों के लिए, जो सिर्फ अपनी आवाज के लिए चुनाव लड़ रहा था,जीतने के लिए नहीं और अपनी इस मुहिम में कामयाब होते हुए भारतीय ट्राइबल पार्टी के छोटूभाई वसावा 50000 मतों से जीतने में कामयाब हुए हैं गुजरात के डेडियापाडा ओर जगड़िया विधानसभा से भारतीय ट्राइबल पार्टी के उम्मीदवार महेश भाई वसावा ओर छोटूभाई वसावा जीतें | गुजरात में आदिवासी आंदोलन की सबसे धारदार बुलंद आवाज हैं | हमारी भीलीस्तान टाइगर सेना के अथक संघर्षों को सलाम ओर पूरी टीम को ढेरों अनेकानेक बधाई ! जय भीम, जय बिरसा !

कांग्रेस के समर्थन से 7 सीटों पर चुनाव लड़ी थी भारतीय ट्राइबल पार्टी

आदिवासी समुदाय के हक के लिए लड़ने वाले छोटू भाई वसावा, जिन की मुख्य मांग पांचवी और छठी अनुसूची की मांगों को पुरजोर तरीके से लागू करवाना रहा है। अब से पहले तीन बार गुजरात से विधायक रह चुके हैं और वह अभी तक जनता दल यूनाइटेड शरद यादव की पार्टी के के गुजरात प्रभारी थे और इस बार उन्होंने भारतीय ट्राइबल पार्टी बनाकर गुजरात विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के समर्थन से अपने साथ उम्मीदवार उतारे थे और उन 7 उम्मीदवारों में से वह अपनी 2 सीटें जीत जीत पाने में कामयाब रहे यह उनके लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है और एक जीत के बाद में उन्होंने साफ साफ कहा है कि उन्होंने यह चुनाव हार या जीत के लिए नहीं बल्कि यह चुनाव उन्होंने अपने संवैधानिक को की रक्षा के लिए लड़ा था और आगे भी उनकी लड़ाई अपने संविधान की रक्षा के लिए जारी रहेगी।

अमित शाह ने मारने का भी प्रयास किया छोटुभाई को

छोटू भाई बसपा की गुजरात में भी वो छवि है जो कि राजस्थान में आदिवासी नेता डॉ किरोड़ी लाल मीणा की है। जिस तरह से राजस्थान के अंदर डॉ किरोड़ी लाल मीणा की छवि से बड़े बड़े दबंग और भ्रष्टाचार करने वाले लोग घबराते हैं, क्योंकि डॉक्टर किरोडी लाल मीणा भी राजस्थान के अंदर अपने हक की लड़ाई के लिए किसी भी स्तर तक मरने मिटने को तैयार रहते हैं वह कभी भी अन्य के सामने अपना सर नहीं झुकाते उसी तरह गुजरात के आदिवासी समुदाय के लिए छोटू भाई वसावा लड़ने मरने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं और इसी की वजह से ही कभी भी 22 साल के बीजेपी के शासन में उन्होंने हार नहीं मानी और अमित शाह पर आरोप भी लगते रहे हैं कि उन्होंने छोटे भाई बसपा का एनकाउंटर करने के प्रयास भी कियेऔर इसके बारे में छोटू भाई बसपा ने कई बार प्रशासन को लिख कर भी दिया था । लेकिन आज की जीत के बाद एक बार फिर साबित हो गया कि जिसके साथ जनता होती है उसको इस तरह के प्रोफॉगंडा से कोई नुकसान नहीं होने वाला और छोटू भाई पटेल की जीत ने ये साबित कर दिया है।

क्या हम गरीबों के घर का नाम व्हाइट हाउस नही हो सकता ?

छोटू भाई को यंहा का लोग मसीहा क्यों मानते है क्योंकि जँहा सरकार काम नही करती वंहा छोटू भाई ने काम किया चाहे स्कूल हो, कॉलेज हो, हॉस्पिटल हो किसानों के लिए सिंचाई की व्यवस्था ये सब काम इन्होंने कम संसाधन होने के बाबजूद अपनी लोगों के प्रति काम की भावना से कराए।

आज गुजरात हो या देश हो उसे ऐसे नेताओं की जरूरत है जो आम जनता के लिए काम कर सके, आम लोगो के दर्द को अपना दर्द समझ सके उनके काम आ सके। हां एक रोचक बात यंहा आकर जानने को मिली जो कि महेश भाई वसावा जी ने अपने आफिस मुख्यालय का नाम वाइट हाउस रखा है, जब उनसे इस बारे में बा हुई तो बोले अमेरिका ही अकेले वाइट हाउस नही रख सकता हमारा भी गरीबों का आफिस भी वाइट हाउस हो सकता है।गुजरात के मोदी जी के विकास का मॉडल बिल्कुल खोखला है चार शहर को छोड़ दीजिए तो गुजरात की स्थिति बहुत ही खराब है जँहा लोग आज भी हेल्थ एजुकेशन और रोजगार के लिए तरस रहे है।

गुजरात आदिवासी समुदाय के लिए लड़ रहे हैं छोटुभाई

छोटू भाई वसावा आदिवासी इलाक़ों के नेता हैं जहाँ वसावा आदिवासियों की बहुलता है. उनका राजनीतिक प्रभाव दो ज़िलों में अच्छा ख़ासा दिखता है. एक भरूच में और दूसरा नर्मदा ज़िले में.छोटू भाई वसावा को उनके समर्थक ‘मसीहा’ और ‘भगवान’ जैसी उपमाएँ देते हैं और उनके बारे में ‘रॉबिनहुड’ जैसी बातें करते हैं.

वसावा जिस एक घर में रहते हैं. वहाँ सैकड़ों आदिवासी समर्थकों से घिरे हुए वे शांत नज़र आते हैं.यह पूछने पर कि आपको लोग रॉबिनहुड कहते हैं, उनके चेहरे पर ख़ुशी की लहर दौड़ जाती है, फिर वे कहते हैं, “लोगों से पूछिए.”मालजीपुरा के आसपास के बारह-पंद्रह गाँवों में लोग मिले जिन्होंने खुलकर कहा कि छोटू वसावा उनके लिए लड़ने वाला नेता है. लउनके लिए कहते हैं कि

“छोटू भाई वसावा हम ग़रीबों के लिए लड़ता है. वह हमारा दाता है. वह हम ग़रीबों का मसीहा है.”

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