यहीं हाल रहा तो तालिया बजाता रह जायेगा मीणा समाज

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उपचुनावो ने राजस्थान की राजनीति में बवंडर पैदा कर दिया हैं, इक ओर जहाँ मृत प्रायः कांग्रेस पार्टी को संजीवनी मिली है तो दूसरी ओर बीजेपी के राजस्थानी नेतृत्व पर सवाल खड़े हो गये है।क्या वसुंधरा की कुर्सी अब भी सुरक्षित है या कोई ओर बड़ा उलटफेर होने की संभावना हैं???

इन तमाम सवालों के जवाब अभी वक्त के गर्भ में है।लेकिन एक सवाल अभी तत्काल खड़ा हो गया हैं कि इन चुनावो से मीणा समाज को कोई विशेष फायदा होगा या नही??कयास लगाये जा रहे है कि समाज डॉ साहब का साथ छोड़कर कांग्रेस की ओर रुख करने को है।लेकिन इन तमाम संभावनाओं के बीच एक सवाल खड़ा होता हैं कि कांग्रेस से मीणाओ को भविष्य में बड़ा फायदा होगा या नही??
तो सोचिये निसन्देह इन चुनाव परिणामो ने सचिन पायलेट को राजस्थान की राजनीति में बड़ा कद दिया है, राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने खुद को काफी बड़ा कर लिया है।इस बात की भी बड़ी संभावना है कि आगामी विधानसभा चुनाव पायलेट को मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाकर लड़ा जाये। बात जातिवाद की नही है लेकिन हम जातिवाद के पछड़े में निश्चित छोंके जाएंगे। गुर्जर समाज राजस्थान की राजनीति में चाणक्य बनकर उभरेगा,तमाम बीजेपी नेताओं को दरकिनार कर सारे गुर्जर कांग्रेस को वोट करेंगे।क्या मीणा ओर गुर्जरो का तालमेल हो पायेगा वो भी तब जब गुर्जर समाज खुद को st में सम्मलित करनी की पहले भी और वर्तमान में भी मांग उठा रहा है।

हमने पहले भी डॉ साहब को किनारे कर राजेश पायलट को राष्ट्रीय स्तर का नेता बनाया है, मीणाओ को क्या मिला??झुनझुना बजाने के लिये।

आपको ये भी याद होगा की जब दौसा सीट आरक्षित हुई तब ही गुर्जरो ने st में सम्मलित होने का गिटार बजाया है इस आवाज में मुझे पायलेट की आवाज आती है।

ये भी तय है कि अगर सचिन मुख्यमंत्री बनता है तो गुर्जरो की चिट्टी st में सम्मलित होने के लिये केंद्र तक जरूर जाएंगी। हम सिर्प तालिया बजायेंगे खुद के कांग्रेसी होने का ढोल पीटते रह जायेंगे।

हां मेरी विचारधारा कांग्रेस को सपोर्ट करती है, बीजेपी के नाम से तो मुझे यूँ ही छींक आती है।
हां मीणा समाज के लिये फायदे की बात यही होगी की गहलोत जी के हाथ मजबूत हो, गहलोत खेमा प्रभावशाली बने। लेकिन सचिन राहुल के विश्वस्त मित्र है तभी तो गुजरात के प्रभारी जरूर बना दिए गये लेकिन राजस्थान के चुनावो में विशेष त्वोज्ज नही मिला।हो सकता हैं गहलोत जी को राजस्थान की राजनीति से अलग केंद्र में भेज दिया जाये।
तो सोचिये सचिन के रहते कांग्रेस से मीणा समाज लाभान्वित होगा या नही??
राजू मीणा
व्याख्याता

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