राजस्थान उपचुनाव परिणाम से होगी प्रदेश से महारानी की छुट्टी !

( फोटो सौजन्य- सचिन पायलट द्घारा मांडलगढ़ निवासी मृतक मांगीलाल मीणा के परिवार के साथ शोक संवेदना बैठक व हत्या में न्याय की मांग की ! )

राजस्थान की एक विधानसभा व दो लोकसभा सीटों पर आगामी 29 जनवरी को मतदान ओर 1 फरवरी को परिणाम घोषित होगें । जिनमें एक लोकसभा सीट अजमेर की है, जो सांवरलाल जाट के निधन से खाली हुई है और दूसरी सीट अलवर की है, जो महंत चांद नाथ के निधन से खाली हुई है ओर वही भीलवाड़ा के मांडलगढ़ विधानसभा से भाजपा विधायक कीर्ति कुमारी का बीमारी के कारण निधन होने से तीनों सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं ।

वही राजस्थान में इस साल के अंत में विधानसभा का चुनाव होने वाला है । इन्हीं सब को देखते हुए मौजूदा उपचुनाव की सरजमीं व सरगर्मियां चरम सीमा पर आ पहूंची है । इसीलिए इन तीनों सीटों के उपचुनाव को सेमीफाइनल के तौर पर माना जा रहा है ।

अभी संपन्न हुये गुजरात चुनावों में भाजपा के बेहद कमजोर प्रदर्शन के बाद अब यहाँ भी केंद्र और राज्य सरकार के प्रति दोहरी एंटी इन्कंबैंसी का मुकाबला बिना पीएम के नेतृत्व में भाजपा को करना होगा, जो वंसुधरा राजे सरकार के लिए संकट का बिषय बन चुका है । पिछले लोकसभा चुनाव में राज्य की सभी 25 सीटें भाजपा ने जीती थी । लेकिन उस हिसाब से केंद्र में राजस्थान का प्रतिनिधित्व बिल्कुल लगभग नगण्य रहा है । इसे लेकर एक बड़े खेमे में सरकार में शुरुआत से ही निराशा और नाराजगी रही है

इसी तरह अलग अलग आरक्षण आंदोलनों के कारण भी राज्य की राजनीति प्रभावित होती रही है । पिछले दिनों प्रदेश के अधिकतर स्थानों पर किसान आंदोलन में बुरी तरह आग व हिंसा भड़की थी, उसका सीधा असर होने वाले उपचुनावों की राजनीति पर होगा । जिसकी कुछ लपटे खासकर अजमेर के जाट किसानों तक पहूंची सो इसका असर मौजूदा भाजपा सरकार के खिलाफ देखने को मिलेगा । क्योंकि प्रदेश का सारा किसान इस बार कमल के फूल को अपने जीवन की वास्तविकता में सबसे बड़ी भूल मान बैठा है ओर जल्द बदला लेने को आतुर व तत्पर है ।

वही बाहुबली गैंगेस्टर आनंदपाल की हत्या व मानव अधिकारों के हनन से सारा राजपूत समाज पिछले कुछ महीनों से आंदोलनरत है । जिसकी आग इस कधर फैली की आज सारा राजपूत समाज जो अधिकतर भाजपा का लंबे अरसे से वोट बैंक रहा, आज वह सारा समाज दोनों लोकसभा व विधानसभा चुनावों में अपना तन-मन से समर्थन ही नहीं बल्कि हर उपचुनावों की जगह पर भाजपा के खिलाफ वोट देने की बड़ी-बड़ी जनसभा करके अपील कर रहे है । तीनों उपचुनाव सीटों पर राजपूत समाज के मतदाता काफी मात्रा में है जो हर सीट पर भाजपा का बुरी तरह समीकरण बिगाड़ सकते हैं ओर जो वास्तविकता में बिगड़ता भी नजर आ रहा है ।

इसी तरह अलवर में गौरक्षा के नाम पर हुई पहलू खान की हत्या की घटना भी राजनीति को प्रभावित करेगी । क्योंकि मेव-मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अलवर में हमेशा बहुत बड़ा रोल अदा करती आयी है । वैसे, बेशक यह 1.5 लाख से अधिक मेव वोट बैंक हमेशा कांग्रेस की विचारधारा की हिमायती व समर्थित कौम रही है । वही इसी तरह वंसुधरा राजे द्वारा किया गया गुर्जर समुदाय को 5% रिजर्वेशन का वादा भी 4 साल में पूरा नहीं हुआ । जिससे सारे समुदाय ने भाजपा को उपचुनावों में जल्द बुरी तरह सबक सिखाने का निर्णय किया है जो परिणामों में दिखेगा ।

मीणा समाज भी कुशलगढ़ एसडीएम रामेश्वर मीणा की संदिग्ध हालातों में हुई ईमानदार अफसर की हत्या को सीबीआई को देने को लेकर राज्य सरकार से मांग करता रहा । लेकिन इस मांग को सरकार ने नजरअंदाज कर दिया जिससे अधिकतर अलवर मीणा समाज के लोग भी सरकार से गुस्से में है ओर उपचुनाव में वंसुधरा राजे को मत द्वारा सिरे से नकारने के मूड़ में है ।

एक समीकरण इस कधर भी, अलवर लोकसभा सीट पर कांग्रेस के परंपरागत वोट रहे मेव मुस्लिम व मीणा समुदाय के लगभग 3 लाख मतदाता, जिन पर कुछ समय से अच्छी पकड़ रही राजपा सुप्रीमों डॉ. किरोड़ीलाल मीणा की वह भी अपनी राजपा पार्टी से कोई प्रत्याशी नहीं उतार रहे है तो स्वाभिवक व निश्चित हैं इन वोटों का बिना धुव्रीकरण हुये पूर्ववर्ती पार्टी कांग्रेस की झोली में बिना झिझक संपूर्ण रूप से आ जाना । ये सब कहना कोई अतिशयोक्ति या गलत नहीं होगा ।

इसी तरह सभी अलवर-अजमेर व मांडलगढ़ की आम-खास कौम भाजपा के कुसाशन से बेहद तंग व परेशान है ! प्रदेश में सबसे बड़ा इश्यू बढ़ती बेरोजगारी का है जो वंसुधरा राजे ने सरकार में आने से पहले 15 लाख सरकारी नौकरी देने का युवाओं से वादा किया वह बुरी तरह फेल हुआ । जिससे आहत होकर प्रदेश के सारे युवाओं ने इन होनें वाले उपचुनावों में भाजपा के खिलाफ घर-घर जाकर वंसुधरा राजे के समर्थित उपचुनाव प्रत्याशीयों को वोट नहीं देने की अपील कर रहे है ।

इस तरह अगर हम धरातलीय उपचुनाव माहौल का आंकलन करें तो भाजपा को बहुत बड़ा नुकसान होने का अंदेशा है । दूसरी ओर कांग्रेस है, जिसने इसी साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियां भाजपा से पहले ही पीसीसी चीफ सचिन पायलट के नेतृत्व में धरातलीय स्तर पर जोर-शोर से शुरू कर दी थी । पायलट ने प्रत्येक जगहों पर जाकर सैकड़ों नुक्कड सभा व बड़ी रैली भी की है । सो, इन तीनों सीटों के चुनाव उसकी तैयारियों की परीक्षा हैं । इनमें से पूर्व में एक सीट तो अलवर राजघराने के भवंर जितेंद्र सिंह की थी । वे राहुल गांधी के करीबी हैं और पिछली सरकार में मंत्री भी रहे थे उनका सहयोग कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. कर्णसिंह यादव को जमकर मिल रहा है । बेशक, मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट के लिए ये चुनाव बेहद खास हैं । राहुल गांधी ने उन पर भरोसा किया है, जो जल्द इन चुनावों के परिणामों के बाद नजर आयेगा । वास्तविक धरातलीय माहौल कांग्रेस की तरफ इशारा कर रहा है, ओर भाजपा से आम-खास सभी मुंह मोड़ रहे है । आगे जनता व नियति तय करेगी जिसका सभी को उपचुनाव परिणाम 1 फरवरी का बेसब्री से रहेगा ।

– हंसराज मीणा

नोट:- उक्त लेख केवल राजस्थान विधानसभा उपचुनाव को मद्देनजर रखकर लिखा गया है !

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Hansraj Meena

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