पूर्वी राजस्थान में सूखे के हालात

–पूर्वी राजस्थान में अकाल ,सूखे के हालात ।

— एक जमाने में जहां हरियाली थी,
भारी बरसात होती थी।

-धान और गन्ने के खेत लहलहाते थे,

  • एक -एक बूँद के लिए तरस रहे हैं.. .. ।

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— समय का बदलाव है।
— पूर्वी राजस्थान (जिसके अंतर्गत धौलपुर, करौली, भरतपुर, सवाई माधौपुर, दौसा, अलवर, टोंक, एवं जयपुर जिले का पूर्वी भाग आता है,)
1990 – 95 तक सरसब्ज था।

–इस भू – भाग पर प्रकृति की अटूट मेहरबानी थी।

–लगभग 800 मिली मीटर तक बरसात प्रतिवर्ष होती थी।

–किसान और पशुपालक खुशहाल थे।

— भू – जल स्तर 20 – 25 फिट पर था।
यहां तक कि बरसात के मौसम में “कुएं उफान “पर होते थे।

— तालाब लबालब होते थे।

— जो साथी इस इलाके के हैं,
जिनका जन्म 1980 से पहले का है,वह भली भांति जानते हैं कि
आज की तुलना में तब गॉवों में खुशहाली थी।

–रबी , खरीफ ,जायद तीनों फसल होती थी।

–देशी खाद उपयोग में लिया जाता था।
— किसान प्राकृतिक तरीके से खेती करते थे।
–बीज भी देशी हुआ करते थे।
शुद्ध खान पान था।
दूध शुद्ध मिलता था।
घी – दूध और इनसे बनी खाद्य वस्तुएं सस्ती सहज उपलब्ध थी।

—चाहे आज उन्नत खेती की बात की जाने लगी हो ,
#लेकिन जल स्तर पाताल में चले जाने की वजह से 600 – 700 फिट तक ट्यूबबेल खुदवाने का खर्चा किसान की सीमा से बाहर है।#
— बिजली के बिल ,ट्यूबबेल के खर्चे ही नहीं निकल रहे हैं,
किसान कर्ज में दब रहे हैं।

—अकाल ,सूखा यहां की नियति बन गई है,
-फलस्वरूप पशुधन नष्ट हो गया।

–पूर्वी राजस्थान में जो हरियाली
जो खुशहाली
पानी की भरमार
प्रकृति की मेहरबानी

1990 – 95 तक थी।
वह अब नहीं।

–कहाँ कल – कल बहती नदियां, नाले, झरने।
–बारहमासा पानी से भरे ताल, तलैया जिनमें एक बरसात का पानी दूसरी बरसात में मिल जाता था।

–लहलहाते धान के खेत।
— गन्ने के खेत।
— गेहूं के हरे खेत।
– कुएं से चड़स की लाव से पानी निकालते बैल।
— रहट की आवाज।

–सर्दियों में चलती चरखी , गुड़ की महक।
सुन्दर बाग़- बग़ीचे।

सब इतिहास हो गया ।

–अब बरसात लगभग 300 मिलीमीटर होती है।
कभी -कभी इतनी भी नहीं।

–एक जमाने में बर्षा के मौसम में “एक- एक महीने तक सूरज नहीं दिखता था।”

झड़ी #लग जाया करती थी।

तालाब ,बांध टूटते थे।

— खेत तालाब बन जाते थे।

–वहां एक -एक बून्द पानी को तरस रहे हैं।

-खेत सूखे हैं।
–पशुओं को चारा पानी नहीं।

–किसान बदहाल ।
— कर्ज में दबे पड़े हैं।

–गरीबी बढ़ रही है।
बुज़ुर्ग बताते हैं कि:—–

अब ” जमाना” कहां होता है ??

–एक जमाने में जमाना यानि “सम्वत् “होते थे।
-सम्वत् का अर्थ -:-पर्याप्त बरसात।

—वैसे भी अब जमाना बदल गया है।
-आज पहनावा, रहन – सहन, प्रेम, सद्भावना सभी की परिभाषा जो बदल गई।
–परिवर्तन तो प्रकृति का नियम है।

–लेकिन पूर्वी राजस्थान में यह परिवर्तन बर्बादी लेकर आएगा ,ऐसा सोचा भी नहीं गया।

–पूर्वी राजस्थान पिछले दो दशकों से #रेगिस्तान# में तब्दील होता जा रहा है।
1- यहां की आबादी विशेषकर किसान,पशुपालक,मजदूर परेशान है।
2-तंगहाल है।
-3–व्यापार पर भी इसका असर पड़ रहा है।

4- -इलाके की अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है।

जल प्रबंधन #की दीर्घकालीन परियोजनाओं से ही इस समस्या से कुछ हद तक निजात मिल सकती है।

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