आज भी दलितों को मंदिरों में प्रवेश नहीं, अगड़े पत्थर फेंककर रोक लेते हैं रास्ता

आज हम धर्म और जातियों से ऊपर उठकर स्टार्टअप इंडिया और बुलेट ट्रेन की बात तो कर लेते हैं, लेकिन इसी देश मे अभी भी ऐसे हालात हैं, जहाँ दलित और आदिवासी लोगों को मंदिरों में घुसने तक नही दिया जाता और कोई इसके खिलाफ आवाज उठाये तो उनको कुचल दिया जाता हैं।

जी हां हम देश के एक ऐसे ही क्षेत्र की बात कर रहे हैं जहां पर आज भी जातियों के आधार पर लोगों को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाता उन्हें भगवान के दर्शन नहीं करने दिए जाते हैं यदि कोई व्यक्ति इस तरह मंदिर में घुसने का प्रयास भी करते हैं तो उसको अगड़े समुदाय के लोग मिलकर मारते-पीटते और उनके घरों पर पत्थर फेंकते हैं | बिल्कुल आप सही पढ़ रहे हो जालौर जोधपुर बाड़मेर पश्चिमी राजस्थान के 2 जिले हैं जहां पर आज भी दलित और आदिवासी समुदाय के लोगों को मंदिर में प्रवेश करने का अधिकार नहीं है और इस बात से कोई भी अनजान नहीं है वहां का प्रशासन वहां के नेता वहां के समाजसेवी सभी इस बात को अच्छी तरह से समझते हैं यहां तक कि वहां के कॉलेज और हॉस्टल में रहने वाले दलित और आदिवासी समुदाय के बच्चों के लिए पीने के पानी और खाने के लिए एक अलग व्यवस्था होती है क्योंकि अगड़े समुदाय के लोग उनको पीने के पानी की मटकी को हाथ नहीं लगाने देते । बेशक कुछ दिनों में शहरी क्षेत्रों में कुछ हालात सुधर है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी यह जातिवाद का जहर नासूर बन कर उभर रहा है।

दलितों के हक के लिए किरोड़ीलाल कर रहे थे प्रयास

कल रविवार को जालोर जिले के शंखवाली गांव में दलित और आदिवासी समुदायो के अनुरोध के बाद डॉ किरोड़ीलाल मीणा, इस जातिवाद के जहर को खत्म करके सभी समाजो को बराबरी के हक दिलाने के लिए आंदोलन कर रहे थे।समाज के लोगों को मंदिर में प्रवेश नहीं देने की बात को लेकर आंदोलन कर रहे थे। पिछले लंबे समय से मीन सेना के पंकज मीणा के नेतृत्व में क्षेत्रीय लोग मंदिर में प्रवेश के अधिकार को लेकर संघर्षरत थे लेकिन इस क्षेत्र के अगड़े लोग अपने वर्चस्व के चलते इन लोगों को धमकियां दे रहे थे, तो यह लोग डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा जी से मिले और अपनी इस दिक्कत को बयान किया था और उसी के चलते डॉ किरोड़ी लाल मीणा कल रविवार को शंखनाद रैली करने के लिए आहोर में आए हुए थे।

शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था आंदोलन

विधायक डॉ किरोड़ी लाल मीणा की रैली में बड़ी संख्या में क्षेत्रीय लोग इकट्ठे हुए थे जिसमें दलित और आदिवासी समुदाय के साथ में सामान्य वर्ग के लोग भी  थे जो सभी  इस मनुवाद की जड़ को खत्म करते हुए सभी समाजों को बराबरी का हक दिलाने और  दलित समुदाय को मंदिरों में प्रवेश करवाने के लिए कह रहे थे यह आंदोलन बड़े शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था और सभी क्षेत्रीय लोगों की बात सुनने के बाद डॉ किरोड़ी लाल मीणा जी ने 11 सदस्य  एक दलित समुदाय के लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से मंदिरों में प्रवेश करने के लिए भेजा था लेकिन  वहां के कुछ अगले समुदाय के लोगों को यह प्रयास रास नहीं आ रहा था और उन्होंने इन 11 युवाओं के ऊपर रास्ते में पत्थर फेंकना चालू कर दिया था और उन्हें मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया था और वहां की पूरी शांति व्यवस्था को छिन्न-भिन्न कर दिया था  लेकिन वहां के प्रशासन भी इन आंगड़ों के दबाव में काम कर रहा था और पत्थर फेंकने वाले असामाजिक तत्वों को गिरफ्तार करने के बजाय, प्रशासन ने विधायक डॉ किरोड़ी लाल मीणा को ही गिरफ्तार करने की साजिश रच डाली । 

मंदिर जाते वक्त दलित युवाओं को मारे पत्थर

सहमति के बाद में धरनास्थल से पंकज मीणा के नेतृत्व में 11 सदस्य दलित आदिवासी लोगों का समूह शंखवाली के मंदिर में प्रवेश करने के लिए भेजा गया और यह लोग शांतिपूर्ण तरीके से मंदिर की तरफ जा रहे थे तभी वहां पर पहले से उपस्थित अगड़े समुदाय के कुछ असामाजिक तत्वों ने इन युवकों के ऊपर पत्थर फेंकना चालू कर दिया था और वहां पर खड़े पुलिस प्रशासन ने असामाजिक तत्वों को गिरफ्तार करने के बजाय इस 11 सदस्य मंडल को ही मंदिर में प्रवेश न करवाने के बजाए उन्हें वापस भेज दिया और 
पुलिस प्रशासन ने शांति व्यवस्था का बहाना देते हुए विधायक डॉक्टर किरोडी लाल मीणा को ही गिरफ्तार कर लिया  मामला बिगड़ते देख किरोड़ीलाल मीणा को पुलिस हिरसात में ले लिया गया। गौरतलब है कि जिला कलक्टर बीएल कोठारी और पुलिस अधीक्षक विकास शर्मा के नेतृत्व में करीब डेढ़ सौ पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे।

किरोड़ीलाल की गिरफ्तारी के बाद आक्रोशित हो गया था पूरा राजस्थान

पुलिस प्रशासन की इस बर्बर कार्यवाही के खिलाफ आम लोगों में एकदम गुस्सा फूटा पड़ा औरधरना स्थल से लेकर पूरे राजस्थान में डॉक्टर किरोड़ी लाल की गिरफ्तार की खबर आग की तरह फैल गई और लोगों ने इसका खुलकर विरोध किया। सभी लोगों का कहना था कि इस तरह से किसी को इस मानवीय समाज  में मंदिरो में प्रवेश करने से नहीं रोका जा सकता और यहां पर तो खुद पुलिस प्रशासन ही दलित और आदिवासी समुदाय को मंदिर में प्रवेश करने से रोक रही है और डॉक्टर किरोडी लाल मीणा की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए लोगों ने जगह जगह धरना प्रदर्शन चालू कर दिए थे सड़क जाम कर दी थी और एकदम पूरे राजस्थान में सरकार सकते में पड़ गई 
और इसके दबाव के चलते ही गिरफ्तारी के कुछ ही देर बाद ही सरकार को आदेश जारी करना पड़ा और पुलिस प्रशासन को डॉक्टर को रिहा करने पर मजबूर होना पड़ा जिसके चलते डॉक्टर को जमानत मुचलका  पर छोड़ दिया गया

आरोप है कि गांव में दलित वर्ग के लोगों को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाता। इसके चलते किरोड़ीलाल मीणा के नेतृत्व में आहोर में यह रैली आयोजित की गई थी। करीब पन्द्रह दिन पूर्व भी डॉ. मीणा आहोर आए थे और समाज के लोगों को सम्बोधित कर लौट गए थे।आहोर में जुटे समाज के लोगशंखवाली गांव में जाने से पहले किरोड़ीलाल मीणा ने आहोर के चरली रोड पर सभा का आयोजन किया। इस दौरान मीणा समाज के युवाओं सहित काफी संख्या में बुजुर्ग भी पहुंचे। सभा में मीणा ने अगवरी गांव में हुए हत्याकांड के खुलासे की मांग उठाई। उनका कहना था कि पुलिस प्रशासन की ओर से इस मामले में पूर्णतया ढिलाई बरती जा रही है। इसी तरह उन्होंने दलितों पर हो रहे अत्याचार को भी बर्दाश्त नहीं होने देने की बात कही। मंदिर में प्रवेश पर रोक की बात को लेकर भी उन्होंने इसका पुरजोर विरोध किया। चरली रोड पर हुई सभा के बाद में यहां से युवाओं की पैदल रैली शंखवाली गांव के लिए रवाना हुई। बाद में मंदिर दर्शन की बात को लेकर मामला बिगडऩे पर किरोड़ीलाल मीणा को पुलिस हिरासत में लिया गया।

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