जयस के प्रयास ला रहे हैं रंग, धीरे धीरे भारत भर के आदिवासी एकजुट होकर समझ रहे हैं अपने अधिकारों को

आज हमारे आदिवासी  समाज के युवा अपने संविधानिक अधिकार की बात कर रहे है तो इन्हें अपने युवाओं पर नाज करना चाहिये था लेकिन आज अपने ही आदिवासी समाज के लोग अज्ञानतावश अन्य गैर आदिवासी ताकतों  के प्रभाव में आकर अपने ही समाज के दुश्मन बनते जा रहे है । आज तक किसने बताया की संविधान में आदिवासियों के कुछ विशेष अधिकार दिये गये है ? जयस के यूवाओं के अथक प्रयास और एकजुटता ने भारत के तमाम राज्यों के अलग अलग आदिवासी समुदायों के युवाओं को एक मंच में लाया और आदिवासी हक और अधिकार के लिये हुंकार भरी। 
 जब आदिवासी हक और अधिकार की बात राष्ट्रीय स्तर पर उठने लगे तो अपने युवा जुझारू साथी  (डॉक्टर हीरालाल अलावा ) को तरह तरह से व्यक्तिगत रूप से आलोचना और  गुटबंदी कर बदनाम और परेशान करने पर उतारू हो गये है ! शर्म आनी चाहिये  ऐसे लोगों को । 

आज जयस टुकड़ों में विभाजित नहीं हुआ बल्कि जो विचारधारा मध्यप्रदेश के छोटे से आदिवासी क्षेत्र के  युवा साथियों ने फैलाया था उस बीज को मध्यप्रदेश से निकालकर पूरे भारत में फैलाने का काम डॉक्टर हीरालाल ने अपने अथक प्रयास से किया । उसकी सुझबूझ ने भारत के लाखों युवाओं को एकजुट किया । आज जयस राष्ट्रीय स्तर पर लीड करने के लिये   ‘ राष्ट्रीय जयस ‘ के रूप में उभरा यही जयस विभिन्न राज्यों में राज्य स्तर पर आदिवासी समाज के युवाओं को एकजुट किया जिसमें जयस  का सर  फक्र से ऊँचा उठाया । 

ना की उसके टुकड़े हुये इतनी सी बात हमारे ही समाज के लोगों को समझ नहीं आ रहा है तो अफसोस होता है उनके सोच पर । आज जयस  राज्यवार खड़ा हुआ ना की उसके टुकड़े हुये । आज जयस के साथ भील , कोल , गोंड , मुंडा , संताल , हो , कुड़कु, उरांओ , मीणा , आदि विभिन्न आदिवासी समुदायों के युवा जुड़ रहे है । 

जयस विभिन्न राज्यों में स्थापित है और अपने परम्परागत रूढ़िगत व्यवस्था को मजबूत करने के लिये जगह जगह सभायें कर रहा है । 

‘ दिल्ली जयस ‘ आदिवासी थिंक टेंक और जयस एडमिनिस्ट्रेशन को कैसे और बेहतर किया जाय इस पर अपना योगदान देता रहा है ।

विभिन्न राज्यों में जयस के प्रतिनिधि । 

झारखंड जयस 

छतीसगढ़ जयस 

बिहार जयस 

उड़ीसा जयस 

महाराष्ट जयस 

गुजरात जयस 

तेलंगाना जयस 

राजस्थान जयस 

जल्द ही असम जयस  भी स्थापित होगा । 
अब मैं डॉक्टर हीरालाल अलावा के आलोचकों से प्रश्न करना चाहता हूँ की क्या आप उनकी आलोचना उनके प्रसिद्धि के कारण करते है ? या विभिन्न राज्यों में जयस को स्थापित करने के लिये उसकी आलोचना की जा रही है ? 

 मैं उन साथियों को धन्यवाद देता हूँ की जिस जयस की कल्पना या विचारधारा की नींव  रखी थी वह अब बीज एक विशाल वृक्ष का रूप ले रहा है । आप लोग ही निर्णय लो और सोचो की एक डॉक्टर अपने सुनहरे भविष्य को ताक पर रखकर भारत के बड़े बड़े राजनीतिक ताकतों को चुनौती दे रहा है।  अपना पूरा कैरियर दाव पर लगाकर अपने आदिवासी  समाज के हक और अधिकार के लिये आवाज उठा रहा है तो उसकी सराहना करने के बजाय उसकी आलोचना की जा रही है ?  क्या हमारा आदिवासी समाज इतना निष्ठुर और मतलबी हो गया है ? 
इतनी अरसे बाद आदिवासी समाज एकजुट करने के लिये कोई अपने क्षेत्र से बाहर नहीं आया लेकिन जब जयस की विचारधारा राष्ट्रीय स्तर पर ‘ राष्ट्रीय जयस ‘ के रूप में उभर कर भारतीय समाज में अपनी खोई हुये मान सम्मान को लेने और भारतीय समाज में आदिवासी समाज  को स्थापित करने का एक प्रयास कर रहा है ! तो केकड़े की तरह टांग खींचते हो ? अपने सोच को दुरुस्त करो और प्रयास करो की जो सामाजिक आंदोलन जयस के युवाओं ने शुरू की थी उसे कैसे और मजबूत किया जाये बल्कि एक दूसरे की कमियाँ दिखाओ । कोई भी व्यक्ति सिद्ध नहीं होता । कमियां खामियां सब में है लेकिन उन कमियों और खामियों को कैसे दूर किया जाय उसपर विचार करो ।  एकजुट करो समाज को मजबूत करो । 

आज आदिवासी समाज क्या समस्याओं से घिरा है विपरीत शक्तियाँ बहुत मजबूत है । उन शक्तियों से अकेला हमारा समाज नहीं लड़ सकता अतः आज की पुकार है एक तीर एक कमान , आदिवासी समाज एक समान । एकता को बल दो दुश्मन हमारी एकता को देखकर वैसे ही पस्त हो जायेंगे । 

एक बार फिर मेरे समाज के युवाओं से अपील है तोड़ो नहीं जोड़ों । आलोचना करना आसान है लेकिन किसी के अच्छे कार्य की प्रशंसा करना भी हमारा कर्तव्य है तभी हमारा समाज आगे बढ़ सकता है आगे बढ़ने का यही एक मंत्र है । एक दूसरे का हाथ मजबूती से पकड़ो आंधियां यू ही निकल जायेगी । 
– राजू मुर्मू

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