आदिवासी ‘जयपाल सिंह मुंडा’

जयपाल सिंह मुण्डा (3 जनवरी,1903) ..🌿🌴
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जब भी आरक्षण का जिक्र होता है, हम भीमराव अम्बेडकर का ही जिक्र करके ही ठहर जाते है, जिन्होने दलित समाज के उत्थान के लिए आरक्षण की बात कही थी…. लेकिन #आदिवासियों के हक की बात करने वाले #जयपालसिंहमुंडा को भूल जाते हैं..!! आदिवासियों के तरफ से संविधान सभा में बोलते हुए उन्होने कहा था, कि…..
“….एक जंगली और आदिवासी समुदाय से आने वाले व्यक्ति के रूप में मुझे प्रस्ताव के कानूनी बारीकियों का ज्ञान नहीं है! लेकिन मेरा सामान्य विवेक कहता है, कि आजादी और संघर्ष की लड़ाई में हरेक आदमी को कंधे से कंधे मिलाकर चलना चाहिए, महाशय अगर पूरे हिंदूस्तान में किसी के साथ खराब सलूक हुआ है तो वो मेरे लोग हैं..!! मेरे लोगों का पूरा इतिहास शोषण और बेदखली का इतिहास है, जो उथल-पुथल और विद्रोहों से अटा पड़ा है, लेकिन फिर भी मैं नेहरू जी के बातों पर यकीन कर रहा हूं कि आजाद भारत में अवसरों की समानता होगी जहां किसी की भी उपेक्षा नहीं की जाएगी ….”

👉 आओ आज इस महान आदिवासी शख्सियत, जिन्होंने अंग्रेजी काल में अपनी बुद्धिमत्ता परिचय देते हुए ICS परीक्षा उत्तीर्ण की.., जिनकी कप्तानी में भारत ने 1928 के ओलंपिक में पहला स्वर्ण पदक हासिल किया.., को उनके 115वें जन्म दिन पर पुष्पांजलि अर्पित करें…!!

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