अल्बर्ट हाल से मीना महिला पुरूष की मूर्तियां हटा लेने का विरोध क्यो नही हुआ ?

आदिवासी मीणा समाज जयपुर
अल्बर्ट हाल संग्रहालय में कुछ सालो पूर्व तक मीना ,भील आदिवासी महिला पुरूष की मूर्तियां थी ।

कुछ दिन पूर्व श्री रघुवीर सिंह जी चीफ मैनेजर S.B.i ने चर्चा मे बताया कि छात्र जीवन मे अल्बर्ट हाल मे मीना आदि वासी महिला पुरुष की मूर्तियां देखी एक दो साल पूर्व देखने गये तो मूर्तियां नजर नही आयी ।संक्षिप्त परिचय मे मीना सरदार के बाये पैर के अंगूठे से जयपुर महाराज का राजतिलक किए जाने का उल्लेख था ।किसने हटवायी यह तो खोज से ही पता चलेगा । स्वयं मैने लगभग तीस बर्ष पूर्व इन मूर्तियों को देखा था ।
इंचार्ज भी वर्तमान मे मीना है परंतु अधिकारी कर्मचारियों की कुछ मजबूरियां होती इस कारण उनका कोई दोष नही है ।
अंग्रेजी काल के संग्रहालय से मूर्तियाँ को हटाया जाना संपूर्ण आदिवासी समाज का अपमान है ।

पहले मूर्तियों की बेशभूषा असभ्य श्रेणी की एक गरीब मीना महिला व पुरूष की थी ।संपूर्ण मीना समाज का प्रतीक नही थी इसी कारण
सस्वतंत्रता सेनानी समाज सुधारक और राजनेता भीमसिंह एडवोकेट ने अग्रणी पहल करते हुए नयी सभ्य बेशभूषा मूर्तियों को धारण करवायी इसके लिए संघर्ष किया यह जानकारी रामगढ पचवारा के नयाबास निवासी स्वः मास्टर शंकर लाल जी ने मुझे सन 2003 के आस पास बतायी ।शंकर लाल जी सन 1945 के लगभग मास्टर बने मुझे बताया कि जयपुर रियासत के मीनाओ मे वे पहले अध्यापक थे ।और भी कई पुराने लोगो तथा परिवार के सदस्यों से जानकारी मिली थी ।

जयपुर मे अनेक सामाजिक संगठन कार्यरत है बडे दुख की बात है कि किसी सामाजिक संगठन ने अल्बर्ट हाल से मीना महिला पुरूष की मूर्तियां हटने पर कोई विरोध नही किया इस मुद्दे को नजरअंदाज किया है ।

मूर्तियां पुनः लगनी चाहिए इसकी पहल सामाजिक संगठऩो को करनी चाहिए यदि कोई संगठन आगे नही आता है तो इनके संचालकों को मे पथभ्रष्टक स्वार्थी ही समझूंगा संगठनो के द्वारा पहल करने पर नेता तो स्वतः ही आगे आ जाऐगे जो कुछ भी हो वैधानिक तरीकें से मुर्तिया पुनः अल्बर्ट हाल में स्थापित होनी चाहिए ।मूर्तियां किसके इशारे पर और क्यो हटवायी इसकी तथ्यात्मक जानकारी भी समाज के सामने आनी चाहिए ।

समाज की प्रतिष्ठा इन मूर्तियों से जुडी है इस लिए मूर्तियां पुनः स्थापित होनी चाहिए ।

निवेदक
डा .प्रहलादसिंह मीना
दौसा

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